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आधे-अधूरे शौचालय के साथ ओडीएफ हो रहा जिला

Lucknow Bureau Updated Sun, 11 Nov 2018 12:02 AM IST
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फैजाबाद। आधे-अधूरे शौचालयों के साथ जिम्मेदारों ने जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने की तैयारी कर ली है। ग्राम पंचायतों में बनने वाले शौचालयों में धड़ल्ले से नियमों की अनदेखी की जा रही है। बनने के तुरंत बाद ही शौचालय खस्ताहाल हो जा रहे हैं। अब विभागीय अधिकारियों ने भौतिक निरीक्षण कर कार्रवाई का संकेत दिया है।
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जिले में कुल 1260 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें से करीब 1127 को बीते माह ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। शेष भी लगभग इसी कगार पर हैं। बीते दिनों दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा जिले को ओडीएफ घोषित किया जाना था जो किन्हीं कारणों से स्थगित कर दिया गया।

यदि इसकी जमीनी हकीकत पर गौर करें तो सिर्फ कागजों में ही जिला ओडीएफ होने के कगार पर है। जिन ग्राम पंचायतों में शौचालय बने हैं, उनमें से कई तो उपयोग के लायक ही नहीं हैं। जिम्मेदारों ने मानकों की अनदेखी करते हुए आननफानन में कहीं गड्ढा खोदवा दिया तो आगे निर्माण कार्य हुआ ही नहीं। कहीं-कहीं दीवार खड़ी हो गई तो छत के पैसे नहीं हैं।

अमर उजाला प्रतिनिधि ने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना की हकीकत जानने के लिए विकास खंड तारुन की ग्रामसभा ओदीरतिनाथपुर का जायजा लिया तो हकीकत की स्याह तस्वीर सामने आयी।

गांव की शिवकुमारी ने बताया कि तीन माह पूर्व ठेकेदार ने शौचालय बनवाया था जिसमें घटिया किस्म की पीली ईंट व मसाले का इस्तेमाल किया गया। तीन महीने में ही शौचालय जर्जर हो गया। इसका प्रयोग करते डर लगता है। गंगाराम व शिवचरन के शौचालय को तीन माह बाद भी छत नसीब नहीं हुई जबकि शौचालय में दो की जगह सिर्फ एक गड्ढा ही बनाया गया है।

लाभार्थियों ने बताया कि प्रधान से छत डलवाने को कहते हैं, तो डांटकर भगा देते हैं। राजकुमार और बेकारू का शौचालय दो माह पूर्व प्रधान के ठेकेदार ने बनवाया था। बेकारू कि पत्नी देवमती ने बताया कि शौचालय जर्जर हो गया है। जान जोखिम में डालकर उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। ठेकेदार पैसा खा गया। शौचालय की जोड़ाई में सीमेंट की जगह बालू का ही प्रयोग किया गया है।

गड्ढा भी सिर्फ दो फीट गहरा है। लाभार्थी दयाशंकर पाठक की पत्नी काजोल ने बताया कि शौचालय निर्माण के समय ठेकेदार को अलग से सीमेंट व मोरंग देकर गिमटी तो ठीक बनवा ली लेकिन दो फीट का एक गड्ढा ही चालू है जबकि दूसरा गड्ढा ठेकेदार ने ढका भी नहीं और न ही इसको शौचालय से जोड़ा है।

श्यामकली कनौजिया का शौचालय तीन माह पूर्व बनना शुरू हुआ जिसका गड्ढा आज तक नहीं बना। तीन माह में ही शौचालय एक तरफ झुक गया है जो कभी भी गिर सकता है। जयशंकर पाठक ने बताया कि गांव में बने ज्यादातर शौचालय निष्प्रयोज्य हैं। प्रधान ने हमसे शौचालय बनवाने को कहा था लेकिन शौचालय बनवाने के बाद अनुदान देने से मुकर गए। ऐसी ही कहानी गांव में बने लगभग सभी शौचालयों की है।

वर्जन:
सभी जगह बने शौचालयों की स्थिति ऐसी ही है, हमारी ग्रामसभा का यह कोई नया मामला नहीं है।
-सुनील यादव, ग्राम प्रधान, ओदीरतिनाथपुर

वर्जन:
यदि इस तरह की अनियमितता बरती गई है तो स्वयं गांवों में जाकर इसका निरीक्षण करेंगे। अगर मामला सही पाया गया तो ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव पर कार्रवाई की जाएगी।
-एसपी सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी

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