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कर्नाटक में बनी प्रभु श्रीराम की प्रतिमा से सजेगा अयोध्या शोध संस्थान

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 22 May 2019 12:04 AM IST
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अयोध्या। रामनगरी में भगवान श्रीराम की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी है। यह प्रतिमा अगले सप्ताह तक अयोध्या पहुंच जाएगी।
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इसे अयोध्या शोध संस्थान में स्थापित किया जाना है। संस्कृति विभाग ने 7 फीट ऊंची इस श्रीराम प्रतिमा को कर्नाटक से 35 लाख में खरीदा है।


यह टीकवुड की बनी काष्ठ कला की दुर्लभ कृतियों में से एक है जिसे 2017 में राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत भी किया जा चुका है। प्रतिमा का अनावरण लोकसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।


प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या में प्रभु श्रीराम की 221 मीटर प्रतिमा लगाने की घोषणा अभी साकार होनी बाकी है। उसके पहले संस्कृति विभाग की ओर से प्रभु श्रीराम की लकड़ी की दुर्लभ प्रतिमा रामनगरी की शोभा बढ़ाने वाली है।


इस प्रतिमा को लाने का प्रयास पिछले 3 वर्षों से किया जा रहा था, जिसमें आखिरकार संस्कृत विभाग को सफलता मिल गई। अयोध्या शोध संस्थान द्वारा इस प्रतिमा को कर्नाटक राज्य इंपोरियम से मंगवाया जा रहा है।


इसकी कीमत 35 लाख रुपये है। इस प्रतिमा को बनाने वाले कारीगरों की मानें तो प्रतिमा के निर्माण में 3 साल से अधिक का समय लगा है, यह प्रतिमा काष्ठ कला की दुर्लभ कृतियों में शामिल है। भगवान श्री रामचंद्र की इस एंटीक मूर्ति अगले सप्ताह अयोध्या शोध संस्थान पहुंच जाएगी।


कर्नाटक शैली में धनुष-बाण लिए हैं श्रीराम
संस्थान के निदेशक वाई पी सिंह ने बताया कि या मूर्ति काष्ठ कला की बेजोड़ मिसाल है। यह मूर्ति टीक वुड से बनी है, जिसमें भगवान एक हाथ में धनुष, दूसरे में बाण और सिर पर कर्नाटक शैली में डाला भगवान तिरुपति बालाजी की तरह का मुकुट लगाए हैं।


वे बताते हैं कि करीब 3 साल पहले ही यह मूर्ति हमने देखी थी तभी मन बना लिया था कि इसे अयोध्या में स्थापित किया जाना है। यह मूर्ति एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनी हुई है।


मूर्ति काष्ठ कला की दुर्लभ कृतियों में से एक है। इस तरह की मूर्ति शायद ही प्रदेश में कहीं हो। उन्होंने बताया की मूर्ति की कीमत 35 लाख है, इसका भुगतान किया जा चुका है। अगले सप्ताह तक पहुंच जाएग। उसके बाद इसे स्थापित किया जाएगा।


शिफ्ट होगी लाइब्रेरी
संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी राम तीरथ बताते हैं कि संस्थान के संग्रहालय और लाइब्रेरी में इस मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। इसके लिए लाइब्रेरी को यहां से शिफ्ट किया जाएगा। शोध संस्थान के मैनेजमेंट ने इस संबंध में प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मूर्ति का अनावरण होने के बाद ही यह जनता के लिए उपलब्ध हो सकेगी।


कई देशों की कलाकृतियों का दुर्लभ संग्रह
अयोध्या शोध संस्थान में पहले से ही विभिन्न देशों की दुर्लभ कलाकृतियों का संग्रह है। यहां भगवान राम और रामायण व राम लीला से जुड़ी विभिन्न देशों की सामग्रियां आकर्षण का केंद्र है।


साथ ही विभिन्न देशों की काष्ठ कला की दुर्लभ कृतियों का भी संग्रह है। संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी राम तीरथ बताते हैं कि संस्थान में कंबोडिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, अमेरिका, त्रिनिडाड, नेपाल, रूस, लाओस, फिजी, श्रीलंका सहित अन्य देशों की रामलीला से जुड़ी सामग्रियां मौजूद है। साथ ही साथ भारत के विभिन्न राज्यों की कलाकृतियों को भी संस्थान में रखा गया है जो कि आकर्षण का केंद्र है।

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