नोटबंदी के बाद रेजगारी से छोटे व्यापारी त्रस्त

अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Wed, 08 Nov 2017 10:11 PM IST
Small businessman resigns after registering
ग्राहक का इंतजार करते दुकानदार हरी चौबे। - फोटो : amarujala
इटावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी को एक साल पूरा हो गया है। भले ही नोटबंदी से बिगड़े हालात सामान्य हुए हों लेकिन नोटबंदी के बाद बैंकों से जारी की गई रेजगारी छोटे दुकानदारों के लिए शामत बन गई है। जिन छोटे दुकानदारों का टर्नओवर हजारों में है। उनके पास रेजगारी के रूप में हजारों रुपए डंप हो गए हैं। इससे उनक ा व्यापार चरमरा गया है। बैंकों ने नोटबंदी में रेजगारी तो जारी की लेकिन अब उस रेजगारी को बैंक अपने यहां जमा करने से इनकार कर रही हैं।  हालात काफी बिगड़ चुके हैं। रेजगारी झगड़े का सबब भी बनती जा रही है क्योंकि छोटा दुकानदार जब रेजगारी लेने से इनकार करता है तो ग्राहक उससे लड़ने को उतारू हो जाता है। उसे कोई रास्ता भी नहीं सूझ रहा है। बर्बाद होते अपने व्यापार को देख दुकानदार नोटबंदी के लिए सरकार को ही कोसता नजर आ रहा है।

ग्राहक रेजगारी देता है पर लेने से कतराता है
महेवा कस्बा में किराने की दुकान किए व्यापारी हरी चौबे का कहना है कि ग्राहक आमतौर पर छोटी चीजों के लिए फुटकर पैसे(रेजगारी) देते हैं लेकिन यदि उन्हें वापसी खुले पैसे दिए जाएं तो लेने से इनकार करते हैं।  जब उनसे रेजगारी के बदले सामान देने से मना करो तो लड़ने पर आमादा हो जाते है। वह कहते हैं हजारों रुपये के सिक्के रखे हैं। थोक व्यापारी भी नहीं लेते और बैंक भी जमा नहीं करती।

कहां ले जाएं रेजगारी समझ में नहीं आता
महेवा कस्बा में पुस्तक विक्रेता गोपालजी का कहना है कि छात्र छत्राएं प्राय: फुटकर रेजगारी ही लाते हैं सबसे अधिक परेशानी एक व दो के छोटे सिक्के की है। बैंक ले नहीं रही है। बैंक वाले कहते हैं कि उनके पास आरबीआई का कोई आदेश नहीं हैं। जब कहते हैं कि न लेने का ही रिजर्व बैंक का आदेश दिखा दें तो अभद्रता करने पर उतारू हो जाते हैं। 10 हजार से अधिक के सिक्के जमा हैं। इसका क्या करें सूझ नहीं रहा।

बैंकों को रेजगारी जमा करनी चाहिए
भरथना के समाचार पत्र विक्रेता सर्वेश सविता कहते हैं कि वह गांव-गांव, गली-गली जाकर अखबार बेचते हैं। अखबार की बिक्री करने पर अधिकांशत: लोग रेजगारी ही देते हैं। जबकि बाजार में रेजगारी चल नहीं रही है। इस कारण से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। वह कहते हैं बैंकों को रेजगारी जमा करनी चाहिए।

ऐसे तो व्यापार चौपट हो जाएगा
कस्बा भरथना में जनरल स्टोर की दुकान किए संजय भाटिया भी बढ़ी रेजगारी की समस्या से परेशान हैं। उन्होंने नोटबंदी को सही ठहराया लेकिन बैंकों द्वारा रेजगारी जमा न करने पर रोष व्यक्त किया। वह कहते हैं कि जब बैंकों ने नोटबंदी के बाद रुपयों के अभाव में रेजगारी दी थी तो फिर उसी रेजगारी को वापस लेने से बैंक क्यूं कतरा रही हैं। यही हालात रहे तो व्यापार चौपट ही हो जाएगा।

सिर्फ दो हजार के नोट ही निकलते हैं एटीएम से
नोटबंदी के बाद सबसे पहले एटीएम बंद हुई। भारतीय स्टेट बैंक की एक-दो एटीएम को छोड़कर अन्य सभी बैंकों की एटीएम तो नोटबंदी के करीब डेढ़ दो माह बाद ही चालू हो सके थे। हालांकि अब एटीएम पर सामान्य स्थिति हो गई है। केवल त्योहार के समय जरूर एटीएम पर रुपये निकालने की समस्या होती है। एटीएम को लेकर लोगों के सामने आज भी समस्या उत्पन्न हो जाती है जब एटीएम सिर्फ दो हजार के नोट उगलते हैं। उस वक्त दो हजार से कम धनराशि निकालने वाले ग्राहक मायूस हो जाते हैं।

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