बेमौसम सब्जियों का उत्पादन महिलाओं को दे रहा है मुनाफा

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2020 12:09 AM IST
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इटावा। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के समूह की महिलाएं कम जमीन में वैज्ञानिक विधि से सब्जी उत्पादन करके जीविकोपार्जन कर रही हैं। विकास खंड बसरेहर में ओम शांति स्वयं सहायता समूह नावली की मोना देवी ने बेमौसम सब्जियों की खेती अपनाकर नई पहल की है। जनपद इटावा में मोना देवी ने बेमौसम सब्जी उत्पादन की। खेती से होने वाली आमदनी में नया आयाम स्थापित करते हुए खेती को एक लाभप्रद व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है।
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स्वयं सहायता समूह को तकनीकी जानकारी मार्गदर्शन कृषि विभाग एवं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने प्रदान किया है। अन्य फसलों की तुलना में बेमौसम सब्जियों की खेती से प्रति इकाई क्षेत्र पर अधिक आमदनी प्राप्त होती है। सब्जी उत्पादक मोना दीदी ने बताया कि पहले खेत में सिर्फ धान और गेहूं की फसल की जाती थी। जिससे आमदनी बहुत कम होती थी। घर का खर्चा चलाने के लिए मोना दीदी एवं उनके पति जितेंद्र कुमार ने मनरेगा में मजदूरी का कार्य किया। बेमौसम सब्जी अपनाने से साल भर रोजगार मिलना प्रारंभ हो गया है। सब्जियों को बाजार में बेचकर तत्काल नगद धनराशि भी प्राप्त हो रही है। बताया कि ओम शांति स्वयं सहायता समूह से 40 हजार रुपये का ऋण लेकर सब्जी उत्पादन का कार्य आरंभ किया है। सब्जी के प्रोजेक्ट को मनरेगा से अभिसरण करते हएु लागत धनराशि को सरकार वहन कर रही है। कुल 1.70 लाख का प्राक्कलन बनाकर शेड व अन्य आवश्यक मूलभूत संरचनात्मक व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। प्लास्टिक मलचिंग तकनीकी का प्रयोग कर वर्तमान में खीरा एवं तरबूज का उत्पादन प्रारंभ हो गया है। कम जमीन पर ज्यादा पैदावार मिलती है। सब्जी का मूल्य अन्य मौसमी सब्जियों की अपेक्षा ज्यादा मिलता है।
सब्जी के उत्पादन से दीदियों को साल भर रोजगार मिलने के साथ साथ ताजा व पौष्टिक सब्जियां मिल रहीं हैं। फलस्वरूप आमदनी में नगर वृद्धि होने के साथ ही कुपोषण जैसी समस्या का भी सफलतापूर्वक सामना करने में ग्रामीण दीदियां सक्षम हो रही हैं।
एक बीघा में होता है एक लाख का खीरा
मोना दीदी का कहना है कि इस समय खीरा और तरबूज की फसल हुई है। साढ़े तीना बीघा में खीरा उगाया गया है। खीरा बाजार में करीब चार लाख रुपये में बिक जाएगा। जबकि इसकी लागत लगभग एक लाख रुपये है। इसके बाद तोरई और खरबूजा की फसल उगायेंगे। यह काम करने की प्रेरणा उन्होंने आजीविका मिशन से मिली। वहीं से उन्होंने ट्रेनिंग लेकर काम शुरू किया।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे कदम
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने बताया कि महिलाओं को हर संभव वित्तीय सहायता दी जा रही है। खाद्यान उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ ही अब संतुलित पोषण की आवश्यकता को महत्व दिया जाने लगा है। उन्नत उत्पादन तकनीकों के माध्यम से बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। अन्य फसलों की तुलना में बेमौसम सब्जियों की खेती से प्रति इकाई क्षेत्रफल अधिक आमदनी प्राप्त होती है।
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