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जापानी इंसेफ्लाइटिस बीमारी रोकने को चूहों का होगा खात्मा11

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:34 PM IST
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इटावा। इंसानों के लिए खतरनाक बीमारी जपानी इंसेफेलाइटिस और अनाज की बर्बादी रोकने को आज से चूहे और छछूंदरों को मारने का अभियान शुरू हो जाएगा। कृषि निदेशालय के आदेश पर कार्ययोजना भी तैयार की जा चुकी है। जिला स्तर पर विभाग ने प्राविधिक सहायकों को किसानों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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उप निदेशक कृषि एके सिंह ने बताया कि खेतों में इस समय धान व बाजरे की फसल पकने को है। मक्का को किसान काटने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे समय में ही चूहों की भरमार होती है। जो न सिर्फ अनाज को खाते हैं, बल्कि आने वाले दिनों के लिए उसे अपने बिलों में इकट्ठा भी करते हैं। लिहाजा कृषि निदेशालय ने जापानी इंसेफेलाइटिस/ एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिड्रोम रोगों की रोकथाम के लिए संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तीसरे चरण में चूहों के खात्मे का निर्णय लिया है।

जिला स्तर पर विभाग ने प्राविधिक सहायकों को एक अक्तूबर से किसानों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। ये किसानों को चूहों और छछूंदरों से फैलने वाली बीमारियों से आगाह करते हुए एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें मारने की जानकारी देंगे।
उप निदेशक कृषि एके सिंह ने बताया कि चूहों को मारने के लिए छह दिनों की प्रक्रिया बनाई गई है। पहले दिन किसान घरों व खेतों आदि आसपास क्षेत्र में चूहों के बिल चिह्नित करते हुए बंद करेंगे। चूंकि चूहा रहता तो एक बिल में है। लेकिन अनाज को इकट्ठा करने और अपनी सुरक्षा को लेकर सात आठ बिल बनाता है। लिहाजा दूसरे दिन किसान उन बंद किए बिलों को देखेंगे। जो बिल खुला हुआ मिलेगा। उससे साफ होगा कि इसी बिल में चूहा रहता है। किसान को इसी खुले हुए बिल में ही सरसों के तेल और भुनी हुई चीजों मसलन चना, लाही, आटा की गोलियों को क्रमश: एक अनुपात 48 भाग में मिलाकर रखना होगा। तीसरे दिन फिर से यही प्रक्रिया दोहरानी है। चौथे दिन इसी बिल में जिंक फासफाइड 80 प्रतिशत की एक ग्राम मात्रा को एक ग्राम सरसों के तेल व 48 ग्राम भुने हुए दानों में मिलाकर रखना है। पांचवें दिन इस जहरीले भोजन से मरे चूहों को जमीन में गाढ़ना होगा। छठवें दिन फिर से बिलों को बंद करना है। यदि बिल खुला मिले तो यही प्रक्रिया दोहरानी होगी।
उप निदेशक कृषि एके सिंह ने बताया कि किसानों को चूहे मारते समय सावधानी बरतनी होगी। रसायन का इस्तेमाल दस्ताने पहनकर करना होगा। इसे बच्चों व अन्य जानवरों से दूर रखना होगा। दवा का उपयोग करते समय खाने पीने की चीजों को ढंकना होगा। मरे हुए चूहों को सावधानीपूर्वक मिट्टी में दबाना होगा।
उप निदेशक कृषि एके सिंह ने बताया कि घरों के अंदर चूहे अक्सर दीवार के किनारे से गुजरते हैं। लिहाजा उनके रास्ते में ही भोजना रखना चाहिए। शक्की स्वभाव होने के कारण चूहा पहले दिन ज्यादा सजगता बरतता है। जब उसे इत्मिनान हो जाता है कि भोजन सही है तो वह उसके इर्दगिर्द मलमूत्र करके अन्य चूहों के लिए संकेत देकर जाता है। जिससे अन्य चूहे बगैर शक किए उस भोजन को खा लेते हैं। इसीलिए पहले दो दिनों तक बगैर जहर मिला भोजन रखना होता है।
उप निदेशक कृषि एके सिंह ने बताया कि चूहों से करीब 50 तरह की बीमारियां फैलती हैं। इनमें टाइफाइड, पैराटाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों के अलावा स्कैबीज अर्थात खुजली भी पैदा होती है। दरअसल चूहे जिस अनाज को खाते हैं। उसी के इर्दगिर्द मलमूत्र विसजत करते हैं। जो बीमारी का कारण बनती है। इस दिशा में हुए अध्ययनों के अनुसार देश में चूहों की वजह से करीब 4.6 से 5.4 प्रतिशत चावल और 11.9 प्रतिशत गेहूं बर्बाद हो जाता है। चूंकि चूहों को रोस्टेड (भुना हुआ) भोजन ज्यादा प्रिय होता है। इसलिए उनके सामने भुना हुआ चना, लाही या आटे की गोलियां बनाकर रखनी चाहिए। यदि एक साथ पूरा गांव इस प्रक्रिया को अपनाए तो इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

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