‘विश्व के 30 फीसदी टीबी रोगी भारत में’

Etawah Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
सैफई। टीबी रोगियों का भारत सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। यहां प्रतिदिन एक हजार टीबी रोगियों की मौत होती है। हालात ये हैं कि विश्व भर के टीबी रोगियों में 30 फीसदी भारत में हैं। यह जानकारी उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान सैफई के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा ‘फर्स्ट पल्मोनरी मेडिसिन अपडेट’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार में संतोष युनिवर्सिटी गाजियाबाद के वाइस चांसलर प्रो. वीके अरोड़ा ने दी। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि आरसी त्रिपाठी, चेयरमैन यूपीटीबी एसोसिएशन, डा. रोहित सरीन डायरेक्टर टीबी एवं रेस्पेरेटरी डिजीज, एलआरएस इंस्टीट्यूट नई दिल्ली, डा. केएन पाटनी सेक्रेटरी यूपीटीबी एसोसिएशन, संस्थान के निदेशक व पल्मोनरी मेडिसिन के विशेषज्ञ डा. प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद मौजूद रहे।
डॉ. अरोड़ा ने टीबी के बढ़ते मरीजों की संख्या पर चिंता जताते हुए बताया कि हर साल देश में 18 लाख टीबी रोगी बढ़ रहे हैं। वर्तमान में देश में लगभग 63 लाख लोग अस्थमा से ग्रसित हैं। इसमें 85 प्रतिशत रोगी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। यह आंकड़े यदि कम करने हैं तो लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक करना होगा। बीमारियों पर आधारित रिसर्च को बढ़ावा देना होगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने मैनेजमेंट आफ टीबी विषय पर कहा कि टीबी किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। भले ही वह दिखने में स्वस्थ्य क्यों न हो इसलिए बीमारी के पहले चरण में ही इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। टीबी और अस्थमा जैसी बीमारी के प्रति भारत में अभी भी लोगों को सही जानकारी नहीं है। डाट्स की प्रमुख बाधाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 6 से 9 माह की लंबी उपचार अवधि डाट्स की प्रमुख बाधाओं में से एक है। रोगी इसका पालन नहीं कर पाता है। उन्होंने इस रोग का इलाज कर रहे चिकित्सकों को सलाह दी कि इलाज में नई तकनीक और औषधियों के बारे में व्यापक जानकारी प्राप्त करें। सही समय पर इलाज से श्वांस संबंधी बीमारियों को रोका जा सकता है। पल्मोनरी मेडिसिन के प्रभारी और कार्यशाला के सेक्रेटरी डा. आदेश कुमार ने सीओपीडी बीमारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह बीमारी दो तरह की होती है। पहला क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, जिसमें 80 फीसदी धूम्रपान व 20 फीसदी अन्य कारण होते हैं। बचने के लिए धूम्रपान छोड़ना होगा व महिलाओं को चूल्हे के बजाए गैस में खाना बनाना होगा। इस मौके पर प्रो. केएम शुक्ला, डॉ. रमाकांत यादव, डॉ.नरेश पाल सिंह, सोमेश्वर दयाल, बलवीर कुमार, डॉ. एके सिंह आदि मौजूद रहे।

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