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बिना कोच के कैसे सीखेंगे खेल की बारीकियां

Etawah Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
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इटावा। खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम में बैडमिंटन व टेबिल टेनिस का प्रशिक्षण देने के लिए बहुउद्देशीय हाल का निर्माण हुआ। इसमें टेराफ्लेक्स कोर्ट बिछा दी गई। इतनी अच्छी व्यवस्था होने के बावजूद बच्चों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण, शासन स्तर से कोच का न मिल पाना है। बच्चे इस बहुउद्देशीय हाल में प्रैक्टिस तो करते हैं लेकिन खेल की बारीकियों को बताने और सही प्रशिक्षण देने के लिए कोच न होने से उनकी प्रतिभा में निखार नहीं आ पा रहा है।
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पिछली बार सपा शासन काल में स्पोर्ट्स स्टेडियम बहुउद्देशीय हाल का निर्माण कराया गया। 2007 में यह हाल खेल विभाग को हस्तांतरित भी कर दिया गया। एक करोड़ चार लाख 69 हजार रुपए की लागत से बने बहुउद्देशीय हाल में इंडोर गेम जैसे बैडमिंटन व टेबिल टेनिस का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई। दो वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम के प्रयास से करीब दो लाख रुपए की कीमत की टेराफ्लेक्स भी बिछवा दी गई।
इसके बावजूद खेल में रुचि रखने वाले जनपद के बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्पोर्ट्स स्टेडियम में कैंप को संचालित कराने की जिम्मेदारी खेल निदेशालय की होती है। वहीं से कोच की व्यवस्था की जाती है। हाकी, फुटबाल आदि खेलों के कैंप संचालित होते हैं लेकिन इंडोर गेम से संबंधित कोच की व्यवस्था आज तक नहीं की जा सकी।

तदर्थ कोच ज्वाइन करके वापस नहीं आया
इस वर्ष खेल निदेशालय ने बैडमिंटन कैंप के लिए एक तदर्थ क ोच की नियुक्ति की। तदर्थ कोच ने यहां आकर ज्वाइनिंग ली और चला गया। उसके बाद आज तक वापस नहीं आया। क्रीड़ाधिकारी ने इसकी सूचना विधिवत खेल निदेशालय को भेज दी। आज तक दूसरे कोच की व्यवस्था नहीं की गई।

जिलाधिकारी की मेहरबानी से चले कैंप
बैडमिंटन व टेबिल टेनिस के लिए खेल निदेशालय से तो आज तक कोच उपलब्ध नहीं हो सका। अलबत्ता डीएम की मेहरबानी से जरूर पिछले वर्ष कुछ समय के लिए बैडमिंटन का कैंप संचालित हुआ। जिला प्रोत्साहन समिति के माध्यम से तदर्थ कोच की व्यवस्था कराई गई। इससे बच्चों को थोड़ा बहुत लाभ मिला लेकिन इस बार वह भी व्यवस्था नहीं हो सकी।

30 बच्चे हैं बैडमिंटन के लिए पंजीकृत
हाल में बैडमिंटन का प्रशिक्षण पाने के लिए तीस बच्चे पंजीकृत हैं। शाम के समय वह बच्चे नियमित आते हैं। विभागीय अधिकारी उनको खेलने के लिए हाल उपलब्ध करा देते हैं लेकिन कोच के अभाव में बच्चे टूटी फूटी प्रैक्टिस ही कर पा रहे हैं।

हर वर्ष खेल निदेशालय को स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न खेलों के कैंप के आयोजन करने का प्रस्ताव भेजा जाता है। इस बार भी प्रस्ताव भेजे गए, जिसमें हाकी, फुटबाल और क्रिकेट के अलावा बैडमिंटन का कैंप मिला। बैडमिंटन के तदर्थ कोच ने ज्वाइन भी किया लेकिन ज्वाइन करने के बाद गया तो फिर वापस नहीं आया। कैंप संचालित करने के संबंध में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। -नवीन कुमार क्रीड़ाधिकारी इटावा

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