तौल में खरा नहीं उतरा बांट माप कार्यालय

Etawah Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
दृश्य-1
सिविल लाइन एरिया का मुहल्ला कल्पना नगर, यहां एक गली में मकान के दो छोटे से कमरों में बांट मांप का सरकारी दफ्तर है। बाहर गंदा सा बोर्ड लगा है। अंदर कमरों की हालत भी जर्जर है। जहां हाथ रख दो वहां धूल ही धूल। जिन तराजुओं से बांटों का मानक वजन निर्धारित होता है, उनका रखरखाव दयनीय और खस्ताहाल है।
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दृश्य-2
दफ्तर में प्रभारी वरिष्ठ निरीक्षक चेतन कुमार और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आनंद स्वरूप बैठे मिलते हैं। एक कुर्सी खाली पड़ी है, जो बड़े बाबू की है। बताया गया कि उनके पास औरैया का भी चार्ज है। एक दिन छोड़ कर यहां-वहां बैठते हैं। एक अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद खाली है। अंदर के कमरे में फाइलें भी बेतरतीब दिखीं। हाथ लगाया तो धूल से हाथ गंदे हो गए।
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दृश्य-3
विभागीय अधिकारी का दायित्व समूचे जिले में व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर जाकर कांटा बांट की जांच करना है, लेकिन विभाग के पास कोई चार पहिया वाहन नहीं है। फिर भी बकौल वरिष्ठ निरीक्षक, वह हर माह करीब 100 से 150 निरीक्षण कर लेते हैं। क्या-क्या कार्रवाईयां की, इसका जवाब बडे़ बाबू के न होने की बात कह कर पचा गए।
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इटावा। सरकारी महकमे के यह तीन दृश्य यहां यह बताने के लिए पेश किए गए हैं कि अहम विभाग भी किस दीन हीन दशा में संचालित हैं। लोग घटतौली के शिकार न हों, इसकी पूरी जिम्मेदारी इस विभाग की है। मगर विभाग खुद दुर्दशा का शिकार है। न तो दफ्तर का रखरखाव सही न रिकार्ड ही दुरुस्त। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को इस विभाग के कामकाज की पड़ताल की तो हालात बद से बदतर नजर आए।
बांट माप का यह दफ्तर भले ही यहां करीब दो दशक से है, लेकिन अधिकारियों की नजर से लगभग ओझल सा रहता है। यहां कामकाज का ढर्रा बनी बनाई लीक पर संचालित है। पूरे जिले में विभाग के अधिकारी या कर्मचारी से ज्यादा एजेंट कार्यरत हैं, जिनके व्यापारिक प्रतिष्ठान सेट हैं। निर्धारित अवधि में यह एजेंट दुकानदार या व्यापारियों के यहां पहुंच जाते हैं। कांटा बांट पर रांगा चढ़ा कर मोहर लगा दी जाती है। जिले भर में यह काम विभाग से रजिस्टर्ड 13 एजेंटों के जिम्मे है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आनंद स्वरूप एक तरह से बाबू का काम देखते हैं। व्यापारियाें से प्राप्त शुल्क की रसीद देने से लेकर विभाग के अन्य काम वह अधिकारी की देखरेख में कर रहे हैं। पूछने बता देते है कि व्यापारियों के आने पर उनके प्रार्थना पत्र लिखने जैसे छोटे मोटे काम कर देते हैं। हालात ये हैं कि शहर भर में घटतौली चल रही है। कम वजन के बांट तो इस्तेमाल होना आम बात है। यहां सामान तौलने के लिए ईंट पत्थर तक का इस्तेमाल किया जाता है।
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बांट माप का यह है प्रावधान
-इस दफ्तर से दो प्रकार की मोहर कांटा बांट पर लगाई जाती है। एक अप्रैल 2011 से मैनुअल कांटा पर लगी मोहर दो वर्ष व इलेक्ट्रानिक कांटा की मोहर एक वर्ष के लिए मान्य है।
- इस प्रकार के कांटा बाट पर मोहर न होने पर दुकानदार को नोटिस भेजा जाता है। सहायक नियत्रंक कानपुर जुर्माना तय करते हैं। यह न्यूनतम 500 रुपए होता है। पैकिंग आइटमों में निर्धारित वजन न मिलने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना किया जाता है।
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- स्टाफ के अभाव में निरीक्षण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। निरीक्षण के लिए अरेंजमेंट करना पड़ता है। जहां तक आफिस का सवाल है तो पिछले माह ही केंद्र सरकार ने भूखंड उपलब्ध कराने को कहा है। डीएम स्तर से जमीन का चयन किया जाना है। इस वित्तीय वर्ष में 16 लाख रुपए का लक्ष्य निर्धारित है। जिसमें 35 फीसदी की पूर्ति कर ली गई है।
चेतन कुमार, वरिष्ठ निरीक्षक, बांट माप विभाग इटावा

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