चंबल पुल पर डेढ़ माह बाद शुरू होगा यातायात

Etawah Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
उदी (इटावा)। इटावा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर क्षतिग्रस्त चंबल के पुल की मरम्मत का काम यातायात बंद होने के बीस दिन बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। धीमी गति से चल रहे मरम्मत कार्य के कारण पुल पर यातायात शुरू होने में अभी डेढ़ महीने का समय और लगने की संभावना है। चंबल पुल पर यातायात बंद होने से रोज उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के हजारों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालक भी मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
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- बीस दिन में 25 फीसदी काम
क्षतिग्रस्त चंबल पुल पर यातायात बंद हुए बीस दिन से अधिक हो गया है। जून के आखिरी दिन एनएच-92 के मुख्य अभियंता व सेतु निगम के एमडी ने विशेषज्ञों की टीम के साथ पुल का निरीक्षण कर मरम्मत का कार्य 10-12 दिन में पूरे करने की बात कही थी। लेकिन बीस दिन बीत गए अभी तक पुल पर महज 25 फीसदी ही मरम्मत का कार्य हो पाया है। मरम्मत के नाम पर क्षतिग्रस्त पुल के हिस्से की खुदाई ही हो पाई है। अधिकारियों की मानें तो अभी क्षतिग्रस्त हिस्से व स्लैब की सफाई का काम चल रहा है। कम से कम 6 दिन बाद क्षतिग्रस्त हिस्से में शटरिंग लगाई जाएगी तथा उसके बाद कंक्रीट का लिंटर पड़ेगा। लिंटर सेट होने में 28 दिन का समय लगेगा। इसके बाद कहीं जाकर पुल पर आवागमन शुरू होने की अनुमति दी जा सकती है। कुल मिलाकर यात्रियों को लगभग डेढ़ महीने तक और परेशान होना पड़ेगा।
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-वाहन स्वामी वसूल रहे मनमाना किराया
चंबल पुल पर यातायात बंद होने से डग्गामार वाहन चालकों की पौबारह हो गई है। यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए डग्गामार वाहन चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इटावा से 35 किलोमीटर दूर स्थित भिंड जनपद आने-जाने के लिए यात्रियों को 50 से 70 रुपए देने पड़ रहे हैं। वाहन स्वामी इटावा से चंबल पुल तक 20 रुपए ले रहे हैं तो उस पार खड़े वाहन 30 रुपए भिंड तक के ले रहे हैं। पुल पार करने के लिए पुल पर रिक्शा किया तो वह 10 रुपए लेता है। वहीं चकरनगर होकर जाने वाली प्राइवेट बसों में 70 रुपए तक यात्रियों से किराए के रूप में वसूले जा रहे हैं।
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लखनऊ की कंपनी द्वारा मरम्मत कार्य किया जा रहा है। पुल के निचले हिस्से में काम होने के कारण देरी हो रही है। आरसीसी की जो दीवार सामने आई थी उसे तोड़कर क्षतिग्रस्त हिस्से व स्लैब की खुदाई की जा रही है। खुदाई होने के बाद नीचे से शटरिंग लगाकर करीब एक सप्ताह बाद कंक्रीट का लिंटर डाला जाएगा। लिंटर तैयार होने में तकनीकी रूप से 28 दिन का समय लगता है। मरम्मत कार्य पूर्ण होने में लगभग सवा महीना लगने की संभावना है। - ताकेश्वर सिंह, जेई एनएच-92

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