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आजादी के रक्षकः बाधाओं के बीच तलाशा रास्ता

Etawah Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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इटावा। काम करने का जज्बा हो तो रास्ते कभी बाधा नहीं बनते। जिले में तैनात सहायक बचत निदेशक प्रभात मिश्रा सरकारी सेवा में होने के बावजूद पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मकसद को कामयाब बनाने में जुटे हैं। प्रभात मिश्रा चार वर्षों से वृक्षों को बचाने का अभियान चलाए हैं। उनके इस प्रयास में स्वामी विवेकानंद सेवा संस्थान का भी योगदान रहा। एमएससी बाटनी से पीजी प्रभात मिश्रा की ख्वाहिश साइंटिस्ट बनने की थी। जिसके पूरी न होने की पीड़ा उनके चेहरे पर झलक आती है। वह सहायक निदेशक पद के साथ महेवा बीडीओ का चार्ज भी संभाल रहे हैं। रेडटेप मूवमेंट नाम के उनके इस अभियान ने अच्छी खासी ख्याति अर्जित की। शहरी क्षेत्र से शुरू हुआ अभियान आज गांव- देहात तक पहुंच गया। उन्होंने आसई, उधन्नपुरा, बहादुरपुर, चंद्रपुरा, चिड़ौली, लवेदी, बरहीपुर व धर्मपुर आदि ग्राम पंचायतों के प्रधानों को पेड़- पौधे लगाने और बचाने का संकल्प दिलाया।
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क्या है रेड टेप अभियान
लाल फीता अभियान में पेड़ों को लाल फीता बांध कर उनकी सुरक्षा का संकल्प दिलाया जाता है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक करीब 10 हजार पेड़ों को लाल फीता बांधा जा चुका है। कई जगह वृक्षारोपण किया गया।

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डीएम ने खुश होकर दिलाई थी रकम
प्रभात मिश्रा के इस अभियान से कई लोग प्रभावित हुए। तत्कालीन डीएम जीएस प्रियदर्शी ने उनके अभियान की पूरी जानकारी ली। बाद में फारेस्ट विभाग से दस हजार रुपए उपलब्ध करवाए। सूचना आयुक्त वीरेंद्र सक्सेना, पूर्व डीएम मधुकर द्विवेदी व पूर्व सीएमएस पीके त्यागी का भी उनके अभियान को सहयोग मिला।

लोगों ने मजाक भी बनाया
शुरू शुरू में लोगों ने इसे मजाक के तौर पर लिया। बाद में लोग जुड़ते गए। कुछ पत्रकार बंधु आपस में पैसा एकत्रित करते और जो भी रकम इकट्ठा होती उसमें वह उतनी ही अपनी ओर से मिला देते। इस रकम से फीता खरीद लेते और कार्यक्रम हो जाते।

लाल फीता बांधने का मकसद
पेड़ों पर लाल फीता बांधने का भी एक मकसद रहा। लाल रंग खतरे का सूचक है। यह दर्शाने के लिए कि यदि पेड़ काटे तो खतरा बढ़ेगा। यह एक तरह से रक्षा कवच बना।
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हर जगह मिली सराहना
प्रभात मिश्रा ने इंटरनेट पर भी अभियान को पहचान दिलाई है। 5 मई को वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ने पर्यावरण से जुड़ी 90 तस्वीरें सेलेक्ट कीं। पांच फोटो उनके अभियान की हैं। ग्राम आसई में उन्होंने 60 फीट के दायरे में करीब 20 फीट का पेड़ गोबर की खाद व बबूल की पत्तियों से बनाया और पूरी तस्वीर में ग्रामीण परिवेश को उकेरते हुए पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। इसे डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने सेलेक्ट किया है। लवेदी गांव में 16 फीट लंबे एक मीटर चौड़े लाल फीते से बरगद के पेड़ को लपेटा। इसमें टाट पट्टी और लाल रंग का इस्तेमाल किया गया। कार्यक्रम के दौरान वृक्ष बचाना है, लाल फीता बांधना है गीत भी गाया जाता है।

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