टीचरों का नहीं हो सका समायोजन

Etawah Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
इटावा। शासन के स्पष्ट निर्देश है कि परिषदीय विद्यालयों में टीचरों के वार्षिक समायोजन की प्रक्रिया को 31 जुलाई तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। बावजूद इसके जनपद में परिषदीय विद्यालयों के टीचरों का समायोजन अभी तक नहीं हो सका है। लिहाजा जहां एक ओर शिक्षण कार्य प्रभावित बना हुआ है वहीं दूसरी ओर समायोजन की प्रक्रिया पूर्ण न हो पाने से टीचरों में ऊहापोह की स्थिति बरकरार है।
हर वर्ष परिषदीय विद्यालयों के टीचरों का प्रमोशन, समायोजन व स्थानांतरण किया जाता है। प्रमोशन प्रक्रिया पर शासन से रोक लग गई है। समायोजन व स्थानांतरण प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया था परंतु विभागीय अधिकारी अभी तक इस प्रक्रिया को पूर्ण नहीं कर सके हैं। समायोजन प्रक्रिया के तहत पिछडे़ ब्लाकों ताखा, सैफई और चकरनगर में कार्यरत महिला और विकलांग टीचरों की काउंसिलिंग 30 जुलाई को पूरी करा ली गई।
टीचरों को उम्मीद थी कि समायोजन में इसी प्रक्रिया को पूर्ण कराना शेष रह गया था बाकी सारी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। उनको उम्मीद थी कि 31 जुलाई को समायोजन स्थानांतरण की सूची जारी कर दी जाएगी और टीचरों को आदेश मिल जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अवधि समाप्त होने के बाद करीब नौ दिन बीत चुके हैं
लेकिन विभागीय अफसर समायोजन प्रक्रि या को पूरा नहीं करा पाए हैं। इससे तमाम परिषदीय विद्यालय टीचर विहीन बने हैं।
रिटायर हुए टीचरों से रिक्त पड़े हैं स्थान
इस वर्ष परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 120 टीचर रिटायर हुए है। जिनमें जूनियर स्तर के 89 टीचर व शेष प्राथमिक स्तर के रहे। प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लग जाने से जूनियर स्तर के विद्यालयों में रिटायर हुए टीचरों के रिक्त हुए स्थानों को जूनियर विद्यालयों में कार्यरत टीचरों के समायोजन से भरे जाने हैं।
समायोजन प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण वह स्थान अभी भी रिक्त बने हुए हैं यही स्थिति प्राथमिक विद्यालयों की बनी हुई है।
सिफारिशी पत्रों की भरमार से लटकी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री का गृह जनपद होने के नाते नेताओं के सिफारिशी पत्र काफी संख्या में आए। यह सिफारिशी पत्र ही इस प्रक्रिया को पूरा करने में बाधक बने। क्योंकि हर शिक्षक सड़क के किनारे और शहर के नजदीक विद्यालयों में अपना समायोजन चाहता है। जबकि ऐसा संभव नहीं है। नेताओं की नाराजगी न झेलनी पड़े इसी कारण अधिकारी इस प्रक्रिया में ऐसा रास्ता तलाशने में जुटे हैं ताकि नेताओं की उनके प्रति नाराजगी कम से कम रहे। इस संबंध में बीएसए शिवप्रसाद यादव से संपर्क करने का प्रयास किया तो वह कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले।

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