नेहरू जी घोड़े पर सवार होकर आए थे सरसईनावर

Etawah Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
ऊसराहार। अपने जीवन के 105 वें वर्ष के पड़ाव पर चल रहे ऊसराहार क्षेत्र के ग्राम गोकुलपुर निवासी बृजभूषण सिंह यादव ने आजादी की जंग को करीब से देखा। आजादी के अपने संस्मरण सुनाते हुए वह कहते हैं कि सन् 1928 में जब नगला ढकाऊ के तीन किसानों ने लगान न देकर अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया तो उनको गोली मार दी गई इससे क्षेत्र में क्रांति फैल गई। इस खबर को सुनकर पं. जवाहर लाल नेहरू यहां आए। गाड़ी के लिए रास्ता न होने पर वह सरसईनावर के जमुनाप्रसाद पालीवाल द्वारा उपलब्ध कराए गए घोड़े से नगला ढकाऊ पहुंचे थे। वहां से वापस आकर उन्होंने सरसईनावर में मौजूद बरगद के पेड़ के नीचे क्षेत्र की भीड़ को संबोधित भी किया था। नेहरू जी के जाने के बाद अंग्रेजों ने घोड़ा उपलब्ध कराने को लेकर जमुनादास पालीवाल को प्रताड़ित भी किया था। पेशे से वैद्य बृजभूषण सिंह यादव आज भी दीन दुखियों, लाचार गरीबों का इलाज करते रहते हैं। वह बताते हैं कि सन् 1942 में छिड़े स्वतंत्रता संग्राम के समय वह भी कांग्रेस के सदस्य थे। उस समय चलाए गए जेल भरो आंदोलन में वह जेल इसलिए नहीं गए थे क्योंकि उनके जेल जाने के बाद मरीजों को इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं रह जाती। उनके सक्रिय योगदान के बावजूद उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने की उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी। उनका कहना था कि उन्होंने कमांडर अर्जुनसिंह भदौरिया और प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी किशनलाल जैन के साथ कई सभाओं में भागेदारी की। वह बताते हैं कि अंग्रेजी हुकूमत का प्रशासन बेहद कड़ा रहता था। कु छ भारतीय जमींदारों के साथ जनता का उत्पीड़न किया करते थे। आजादी के दिन की याद करते हुए बताते हैं कि उस दिन सब जगह उत्सव का माहौल व्याप्त था। वर्तमान हालात पर कहते हैं कि आजादी के बाद अदेश का यह हाल कर दिया जाएगा यह सपने में भी नहीं सोचा था। यदि आज के नेताओं ने आजादी का संघर्ष किया होता तो जनता का हक भ्रष्टाचार करके नहीं छीनते।

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