भाई की कलाई पर प्यार बांधा

Etawah Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
इटावा। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जुड़ा रक्षा बंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध कर उनके दीर्घायु की कामना की तो भाइयों ने भी रुपए और उपहार देकर उनकी रक्षा का वचन दिया। शहर के पक्का तालाब और महेरा मंदिर पर परंपरागत ढंग से मेला लगा। जहां लोगों ने भगवान भोले बाबा की पूजा अर्चना की और भुजरियां अर्पित की। लोगों ने बड़ोें के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन पर्व मनाया जाता है। भगवान भोलेबाबा के सावन माह का यह अंतिम दिन होता है। पूरे माह भोले शंकर की पूजा अर्चना की जाती है। रक्षाबंधन के दिन भी महादेव को भुजरियां अर्पित की जाती हैं। पर्व को लेकर युवतियों और बच्चों में सबसे अधिक उत्साह देखने को मिला।
एक दिन पूर्व से ही घरों और ब्यूटीपार्लर में मेहंदी लगवाने को लेकर युवतियों में उत्साह रहा। कई ब्यूटीशियन ने घर- घर जाकर मेहंदी लगाई। नए वस्त्रों को पहनने का चलन भी है। इसे लेकर बच्चों में खासी उत्सुकता रही कि मम्मी-पापा उनके लिए नई ड्रेस लेकर आए हैं। हाथों में मेहंदी रचाए 7 वर्षीया अंशिका ने चहकते हुए बताया कि वह तो अच्छे से सजेगी। गुरुवार सुबह से ही पर्व की तैयारियां होने लगीं। मिठाई, दूध, घेवर, सिवइयाें व फेनी की दुकानों पर भीड़ लगी रही। महंगाई के बावजूद लोगाें ने खरीददारी की। कहीं भाइयों ने बहन के यहां जाकर तो कहीं बहनें भाइयों के यहां पहुंची। एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी।
शाम के वक्त पक्का तालाब और महेरा मंदिर पर मेले की रौनक रही। बड़ी संख्या में लोग परिवार समेत यहां पहुंचे और तालाब व तलैया में भुजरियां विसर्जित करके भोले बाबा की पूजा अर्चना की। एक- दूसरे को भुजरियां देकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। चाट- पकोड़े और झूला इत्यादि का आनंद उठाया।

बची राखियों को बेचने की रही होड़
पर्व पर राखी बाजार अपने चरम पर होता है। पिछले एक सप्ताह तक राखियों को जो कीमत रही। पर्व के दिन उनके दाम काफी गिर गए। दुकानदारों में माल के रुकने का डर रहा। नतीजतन ज्यादा से ज्यादा राखियों को बेचने की होड़ सी दिखी। पक्की सराय पर सबसे अधिक न केवल राखियां बिकती है, बल्कि तमाम वैरायटी भी मौजूद रहती है। पिछले दिनों यहां 100 से डेढ़ सौ रुपए तक की राखी बिकी। आमतौर 20 से 40 रुपए वाली राखी की मांग सर्वाधिक रही। वहीं पर्व के दिन पांच रुपए की दो राखियां आवाज लगाकर बेची जाती रहीं। दुकानदारों का कहना रहा कि माल का स्टाक जमा रहने से रकम फंसी रहेगी। लिहाजा जितना ज्यादा से ज्यादा माल निकाला जा सके इसलिए कीमतें गिरा दी गई हैं। दुकानदारों का यह मानना भी रहा कि इस बार बाजार गत वर्ष की अपेक्षा हल्का रहा।

पनीर रहा गायब, मिठाइयां जमकर बिकीं
गर्मी में वैसे भी दूध की किल्लत बढ़ जाती है। रक्षा बंधन के दिन तो दूध का मिलना लगभग नामुमकिन माना जाता है। नया चौराहा स्थित दूध की बड़ी दुकानें बंद रही। शहर में अन्य दुकानें खुली भी रही तो पनीर नजर नहीं आया। एक दो दुकानों पर रेट लिस्ट 180 रुपए के बजाय 200 रुपए किलो लिखा दिखा। वहीं मिठाइयों की दुकानों पर खरीददारों की काफी भीड़ रही। देशी घी से निर्मित मिठाईयाें की भी खूब मांग रही।

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