ब्लैक आउट हुआ तो फिर मची हाय-तौबा

Etawah Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
इटावा। एक तो भीषण उमस भरी गर्मी, उस पर पावर ग्रिड के फेल हो जाने से मंगलवार को लोग परेशान हो गए। पूरे दिन गर्मी को लेकर हाय-तौबा मची रही। कंप्यूटर बंद होने से दफ्तरों में कामकाज ठप हो गए। मोबाइल टावर बंद हो गए। जिला अस्पताल में मरीज बेहाल रहे और उनके तीमारदारों का बुरा हाल रहा। इनवर्टर ने भी दो चार घंटे ही साथ दिया। शाम तक बिजली न मिलने से पूरा शहर पानी को तरस गया। बीएसएनएल के मोबाइल टावरों ने काम करना बंद कर दिया। बिजली के अभाव में समस्याएं और भी विकराल रूप में सामने आईं। लोग दिन भर पसीना पोंछते रहे।
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24 घंटे बाद फिर जूझना पड़ा
महज दो दिन पूर्व ही उत्तरी ग्रिड फेल हो जाने से नगर के लोगों को करीब 24 घंटे तक ब्लैक आउट के साथ गर्मी और पेयजल किल्लत से जूझना पड़ा था। मंगलवार को फिर से यही हालात बन गए। दोपहर एक बजे जब बत्ती गुल हुई और एक दो घंटे में नहीं आई। लोगों के जेहन में आशंका तैरने लगी कि कहीं फिर से कोई बड़ी खराबी न हो गई हो। बिजली अधिकारियों को फोन होने लगे, लेकिन अधिकारियों ने फोन नहीं उठाए। फिर खबर तैरने लगी कि दोबारा ग्रिड में खराबी आई है। इस बार उत्तरी व पश्चिमी ग्रिड के एक साथ फेल हुए हैं। इस खबर के साथ लोगों की बेचैनी भी बढ़ने लगी।
मंगलवार की सुबह भी बिजली सप्लाई बाधित रही। दो घंटे के बाद भी बिजली आ जाने पर लोगों ने राहत की सांस ली। दोपहर करीब एक बजे बिजली के जाने और शाम तक न आने पर लोगों की चिंताएं बढ़ गई।
अन्य दिनों की अपेक्षा मंगलवार को बादलों के छाए रहने से गर्मी ज्यादा रही। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। तीमारदार हाथ के पंखों या पट्ठा आदि से गर्मी से निजात पाने की कवायद करते रहे।
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बंद हुए मोबाइल टावर
दोपहर से ही आउटर एरिया के मोबाइल टावरों ने काम करना बंद कर दिया। स्कॉन महासचिव राजीव चौहान ने फोन में बताया कि नई मंडी, अड्डा गूलर, उदयपुरा आदि क्षेत्र के टावर बिजली गुल होने के साथ आने बंद हो गए। जबकि टावरों पर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर जेनरेटर भी लगाए जाते हैं। शाम होते-होते मोबाइल से बातचीत होना मुश्किल हो गया।
मंगलवार शाम को लोग पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेने को मजबूर हुए। सबमर्सिबल पंप शोपीस बनकर रह गए। लोग एक दूसरे से गड़बड़ी के बारे में पूछते रहे।
- चूंकि बिजली आपूर्ति में सुधार हो गया था। लिहाजा वैकल्पिक व्यवस्था पर अधिक जोर नहीं रहा। मंगलवार को चार घंटे तक इंवर्टर का बैकअप बना रहा उसके बाद बंद हो गया। अब जेनरेटर की व्यवस्था सुचारु की जा रही है। - राजेश कुमार, जिला प्रबंधक दूरसंचार

बिजली के न होने से दिक्कत तो है, मगर 4-5 घंटे लगातार जेनरेटर चलाकर मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। आगे भी जेनरेटर के जरिए बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। - डा. वीएस अग्निहोत्र, सीएमएस, जिला अस्पताल



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