मनोरंजन सदन के पास रेलवे कालोनी का हाल, गिरते प्लास्टर, टपकती छत के नीचे रहने की मजबूरी

Etawah Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
इटावा। रेलवे कर्मियों के लिए मनोरंजन सदन के पास बने आवास देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। आए दिन प्लास्टर टूट-टूट कर गिरता है। बरसात के दिनों में छतों में पड़ी दरारों से पानी टपकता है। लकड़ी के दरवाजे पूरी तरह से गल चुके हैं। इन क्वार्टरों में रहने वाले रेलवे कर्मियों के परिवारों पर हर पल खतरा मंडराता है लेकिन अफसरों को इसकी फिक्र नहीं है।

समस्या-1
रेलवे कालोनी में सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। आवासों के चारों ओर गंदगी पसरी रहती है। लोगों का कहना है कि रेलवे कालोनी होने के कारण पालिका का कोई भी सफाई कर्मी साफ-सफाई के लिए नहीं आता है। जब समय मिला तो हम लोग ही अपने-अपने क्वार्टरों के आसपास सफाई कर लेते हैं।

समस्या-2
रेलवे कालोनी के बांशिदों के लिए पेयजल समस्या नई नहीं है। यहां आए दिन पेयजल के लिए मारामारी मचती है। कालोनी में लगे हैंडपंपों में से कई हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। कर्मचारी भी चाहते हैं कि उनकी कालोनी में भी जगह-जगह सबमर्सिबल पंप पेयजल आपूर्ति के लिए लगें पर कहें तो किससे।

समस्या-3
क्वार्टरों के सामने फर्श व गलियों के पक्के न होने से बरसात में जलभराव व कीचड़ की समस्या से रेलवे कर्मियों को जूझना पड़ता है। दरवाजों पर पानी भरजाने से संक्रामक रोगों का खतरे से भी रेलवेकर्मी चितिंत रहते हैं।

रेलवे कालोनी
टाइप एक-250 आवास (तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए)
टाइप दो-125 आवास (द्वितीय श्रेणी कर्मचारियों के लिए)
टाइप तीन-50 आवास (अधिकारियों के बंगले सभी सुविधाओं युक्त)

खुद कराते मरम्मत
रेलवे कर्मचारियों की मानें तो कई बरसों से आवासों की मरम्मत तो छोड़िए पुताई तक नहीं हुई है। जो जिस आवास में रहता है उसे खुद ही क्वार्टरों की मरम्मत करानी पड़ती है।

अफसर बोले-
बजट की कमी के कारण मरम्मत व पुताई का कार्य क्रमानुसार होता रहता है। इस मद में जितना पैसा मिलता है खर्च किया जाता है। टूटे दरवाजे को रिप्लेस किए जाने का कार्य भी चल रहा है-एनएस यादव (वरिष्ठ खंड अभियंता)

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