खाद और डीजल की महंगाई ने कमर तोड़ी

Etawah Updated Fri, 27 Jul 2012 12:00 PM IST
इटावा। किसानों के लिए अब खेती करना भी दुश्वार हो गया है। खाद और डीजल की महंगाई ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान आशंकित है कि महंगी खाद और डीजल का उपयोग करने के बाद उसको उत्पादन का वाजिब मूल्य मिल भी पाएगा या नहीं। जिस यूरिया खाद का कम प्रयोग होता है उसकी कीमतें सरकार ने नहीं बढ़ाईं। ज्यादा उपयोग होने वाली डीएपी की कीमतों को महज एक वर्ष के अंतराल में तिगुना कर दिया गया।
मंगलवार से हुई बारिश से किसानों के चेहरों पर रौनक तो आई लेकिन महंगाई के चलते वह रौनक फीकी है। इस समय धान, बाजरा की बुवाई होनी है। इटावा जनपद का पचार क्षेत्र में धान की ही अधिक पैदावार होती है जबकि अन्य क्षेत्रों में बाजरा की फसल ली जाती है। दोनों ही फसलों में खाद की आवश्यकता रहती है। रोपाई होने के 10-15 दिन बाद किसान को डीएपी की जरूरत पड़नी है लेकिन जिस तरीके से डीएपी के दाम उछले हैं उस बारे में सोचकर किसान परेशान है। डीजल मंहगा होने से जुताई और फसलों में पानी लगाना मंहगा हो जाएगा। पैदावार की कीमत ठीक नहीं मिलेगी तो खेती घाटे का सौदा साबित होगी।

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