हर घंटे बदलता रहा बरालोकपुर का पारा

Etawah Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
इटावा। चौबिया थाना अंतर्गत बरालोकपुर गांव में हुए खूनी हादसे की खबर जिसने सुनी वह बदहवास हो गया। गांव से काफी दूर तक सुनाई दे रही चीखपुकार दुर्घटना की भयावहता बयां कर रही थी।
सड़क पर चारों तरफ खून के छींटे और पत्तों की तरह महिलाओं के क्षतविक्षत शव पड़े थे। जिसने भी इस मंजर को देखा उसकी रूह तक कांप उठी। शनिवार की रात नौ बजे हुई घटना के बाद रातभर जनप्रतिनिधियों के न आने से तो कभी पुलिस की कार्यशैली से रह-रह कर भीड़ आक्रोशित हो उठती। डीएम, एसएसपी, एडीएम, एसडीएम, एएसपी समेत जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर जमा रहे। काफी समझाने के बाद भी लोगों ने मृतकों के शवों को सुबह तक नहीं उठने दिया। बाद में डीएम के मुआवजा की घोषणा के बाद सुबह करीब चार बजे लोगों ने पुलिस को शव उठाने की इजाजत दी। इटावा-फर्रुखाबाद मार्ग पर करीब दस घंटे तक जाम लगा रहा। रात नौ बजे के आसपास हुई इस हृदयविदारक घटना के हर क्षण पर अमर उजाला की टीम ने अपनी निगाह रखी।

- समय रात 09:30 बजे- आधा किमी दूर तैनात थी पीएसी
अमर उजाला टीम रात 9.30 बजे घटना स्थल पर पहुंच गई। गांव के बाहर करीब आधा किमी दूर से पीएसी की टुकड़ियां तैनात मिलीं। घटनास्थल से करीब दो सौ कदमों की दूरी पर भारी पुलिस बल के बीच खड़े एसएसपी राजेश मोदक आला अधिकारियों को मोबाइल के जरिए घटना की जानकारी दे रहे थे। सामने आक्रोशित भीड़ पुलिस पार्टी पर हमलावर अंदाज में खड़ी नजर आ रही थी। जैसे ही पुलिस बल शवों को उठाने के लिए एक कदम आगे बढ़ता, आक्रोशित लोग हाथों में पत्थर व डंडे लिए दो कदम आगे बढ़ आते। पुलिस और पब्लिक के बीच सड़क पर आड़ा खड़ा ट्रक सीमा लाइन का काम कर रहा था। लोगों के आक्रोश के कारण पुलिस अधिकारी चेसिस के उस पार जाने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे।

- समय रात 10:00 बजे - एसडीएम ने आम जनता की तरह लिया जायजा
गांव के कुछ संभ्रांत लोगों की मदद से पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को समझाने का प्रयास किया। आम जनता की तरह भीड़ में शामिल होकर एसडीएम सदर शैलेंद्र भाटिया ने दुर्घटनास्थल का मंजर देखा। कुछ समय के लिए लोगों का आक्रोश थमा तो एडीएम विद्याशंकर सिंह, एसएसपी सहित पुलिस के अन्य अधिकारी भी पड़ताल में जुट गए। जैसे ही अधिकारियों ने शवों को उठाने की बात की भीड़ फिर से भड़क गई। भीड़ का रुख देखकर पुलिस ने अपने कदम वापस खींच लिए। रात 10:30 बजे डीएम पी गुरुप्रसाद ने मौके पर पहुंचकर गांव के बड़े बुजुर्गों से बात करके शव को उठाने देने का अनुरोध किया। लेकिन गुस्साई भीड़ नहीं मानीं। भीड़ ने नारेबाजी करते हुए साफ शब्दों में कह दिया कि शवों को तब तक नहीं उठने दिया जाएगा जब तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव या फिर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव मौके पर नहीं आते। घटना के डेढ़ घंटे बाद भी सांसद-विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के मौके पर न पहुंचने से भीड़ नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के इटावा में होने के बावजूद मौके पर न पहुंचने से लोगों में नाराजगी देखी गई।
- समय रात 11:00 बजे - भीड़ ने पथराव के उद्देश्य से इकट्ठा किए ईंट-पत्थर
पुलिस ने जैसे ही शवों को उठाने का प्रयास किया शांत भीड़ फिर से भड़क गई। लोग मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग पर अड़े हुए थे। आक्रोश बढ़ता देख भीड़ के बीच खड़े पुलिसकर्मी व अधिकारी सीमा लाइन की तरह खड़े चेसिस के दूसरी ओर जमा हो गए। आक्रोशित भीड़ ने पथराव के उद्देश्य से इधर उधर र्से इंट पत्थरों को सड़क पर जमा करना शुरू कर दिया। इसके बाद से एक घंटे तक एक ओर पुलिस बल व अधिकारी बिल्कुल शांत अंदाज में खड़े रहे, दूसरी ओर खड़े आक्रोशित ग्रामीण पुलिस व शासन-प्रशासन को अपने अंदाज में कोसते रहे।
- समय रात 12:30 बजे - सांसद को अपशब्द कह लौटने को कहा
सांसद प्रेमदास कठेरिया बरालोकपुर गांव तो पहुंचे, लेकिन वह भीड़ के बीच जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। जहां पुलिस के वाहन खड़े थे वहां उनकी गाड़ी रुकी और वह उतरकर गांव के दूसरी ओर अपने कार्यकर्ताओं व संभ्रांत लोगों के बीच पहुंचे। पहले उन्होंने गांव के ही कार्यकर्ताओं व संभ्रांत लोगों को भीड़ में भेजकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बाद में कार्यकर्ताओं व संभ्रांत नागरिकों की ओर से इशारा होने पर वह भीड़ में पहुंचे, लेकिन उन्हें भी लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। लोगों ने सांसद को अपशब्द कहते हुए उन्हें जाने के लिए कह दिया। सांसद जब बैरंग लौटे तो प्रशासन के हाथ पैर फूल गए।
- समय रात 01:30 बजे - भीड़ का आक्रोश देख पुलिस मौके से हटी
पुलिस ने शवों को उठाने का प्रयास किया तो भीड़ एक बार फिर उग्र हो गई। मौके की नजाकत को समझते हुए एसएसपी ने घटना स्थल से पुलिस कर्मियों को हटने के निर्देश दिए। आक्रोशित भीड़ ने मौके पर जमा किए पत्थरों को एक बार फिर हाथों में ले लिया। उत्तेजित लोग घरों से लाठियां, डंडे व सरिया लेकर सड़क पर पुलिस के सामने आ गए। माहौल को देखते हुए अधिकारी व पुलिस फोर्स ने घटनास्थल को छोड़ दिया और एक घंटे तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
- समय रात 02:30 बजे- स्थानीय नेताओं की मदद से वार्ताओं के दौर शुरू
प्रशासन ने स्थानीय नेताओं को जमा करके भीड़ के बीच भेजा और फिर वार्ताओं का दौर शुरू हुआ। एक घंटे की वार्ता के बाद उत्तेजित भीड़ दो गुटों में बंट गई। एक गुट ने शवों को उठाने की इजाजत दे दी तो दूसरा गुट विरोध में खड़ा रहा। फिर शांत हुए गुट के लोगों ने उत्तेजित गुट में शामिल लोगों को समझाया। जिलाधिकारी पी गुरुप्रसाद ने लोगों के साथ बैठक करके मृतकों के परिवारीजनों को दो-दो लाख रुपए आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की। इसके बाद करीब चार बजे स्थिति सामान्य हुई और लोगों ने पुलिस टीम को शवों को उठाने की इजाजत दी।
- समय सुबह 04:00 बजे - पब्लिक ने शवों को उठाने की इजाजत दी
उत्तेजित भीड़ द्वारा शवों को उठाने की इजाजत दिए जाने के बाद भारी संख्या में मौजूद पुलिस फोर्स ने बिना कोई देरी किए शवों को घटनास्थल से उठाकर पोस्टमार्टम भेजने का काम शुरू कर दिया। करीब एक घंटे में सभी शवों को सील करके इटावा भेज दिया गया। प्रशासन ने हाइवे पर खड़े आड़े ट्रक को हटवाकर सुबह करीब 6 बजे यातायात शुरू कराया।

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