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बहुरेंगे जिला अस्पताल के दिन

Etawah Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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इटावा। जल्द ही जिला अस्पताल के दिन बहुरने वाले हैं। शासन से जिला अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इमरजेंसी व प्रशासिनक भवन के निर्माण के लिए स्वीकृति मिल गई है। निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ रुपया भी कार्यदायी संस्था को अवमुक्त कर दिया गया है।
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मोतीझील पर बने जिला अस्पताल में अब इलाज को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त इमरजेंसी व इमरजेंसी वार्ड का निर्माण नए सिरे से होगा। इमरजेंसी ब्लाक की पहली मंजिल पर प्रशासनिक भवन बनाया जाएगा। सरकार ने इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी है और निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था पैक्टफैक्ट को दी गई है। निर्माण कार्य के लिए शासन से अब तक एक करोड़ रुपए भी अवमुक्त कर दिए गए हैं। निर्माण कार्य से पहले कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों ने अस्पताल परिसर का सर्वे किया। अब दो-एक दिन में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में निर्णय लिया जाएगी की निर्माण कार्य कब से शुरू होना है।


यहां बनेगा इमरजेंसी ब्लाक
अभी तक तो इमरजेसी ब्लाक हृदयरोग विभाग के बगल में खाली पड़ी जमीन पर बनना तय था लेकिन सर्वे करने आए इंजीनियरों ने ऊपर हाईटेंशन लाइन और नीचे सीवर लाइन पाई। इस कारण यहां इमरजेंसी ब्लाक बनने में अड़चन आ रही है। अब अस्पताल के मुख्य गेट से घुसते ही जहां पुराना नलकूप लगा है वहां खाली पड़ी जमीन पर इमरजेंसी ब्लाक के लिए सर्वे कर लिया गया है। इमरजेंसी ब्लाक के प्रथम तल पर प्रशासनिक भवन बनाया जाएगा।

यह रहेंगी सुविधाएं
590 वर्ग मीटर में बनने वाला नया इमरजेंसी ब्लाक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इमरजेंसी के साथ दस बेड का वार्ड भी बनेगा जिसमें अंडरग्राउंड आक्सीजन लाइन के साथ अन्य आवश्यक उपकरण मुहैया कराए जाएंगे। मरीज गेट से घुसते ही सीधे इमरजेंसी ब्लाक में प्रवेश करेंगे। इमरजेंसी के प्रथम तल पर प्रशासनिक भवन 510 वर्गमीटर में होगा।

अफसर बोले
इमरजेंसी ब्लाक निर्माण के लिए सर्वे कर लिया गया है। सरकार की ओर से एक करोड़ रुपए की धनराशि अवमुक्त की गई है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा-प्रदीप त्रिवेदी, असिस्टेंट इंजीनियर, कार्यदायी संस्था

तब डाक्टरों की और कमी हो जाएगी
इटावा। यह तो अच्छा है कि जिला अस्पताल में आधुनिक इमरजेंसी का निर्माण होने जा रहा है लेकिन डाक्टरों की कमी से इसकी सार्थकता पर सवाल उठ रहे हैं। जिला अस्पताल बीते कई वर्षों से डाक्टरों की कमी से जूझ रहा है। भव्य बिल्डिंग तो है लेकिन पर्याप्त स्टाफ नहीं है। अभी जो चिकित्सक इमरजेंसी में ड्यूटी करते हैं वही ओपीडी भी अटेंड करते हैं। जब इमरजेंसी अस्पताल की बिल्डिंग से दूर हो जाएगी तो डाक्टरों के साथ अन्य नर्सिंग स्टाफ केवल इमरजेंसी के समय इमरजेंसी की ही ड्यूटी कर पाएगा। वह बार-बार दौड़कर अपने रूम में तो ओपीडी अटैंड करने नहीं आएगा। जानकारों की मानें तो शासन को बिल्डिंग के साथ-साथ मैनपावर पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि अस्पताल की सार्थकता साबित हो।

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