पढ़ने आते हैं या झाड़ू लगाने

Etawah Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
बकेवर (इटावा)। बेसिक स्कूल खुले एक सप्ताह हो गए परंतु पढ़ाई का माहौल अभी तक नजर नहीं आया। समय से स्कूल न खुलना, विद्यालयों में आकर गपशप करना, कक्षाओं में शोर मचाते बच्चों का माहौल है । आश्चर्य तब होता है जब किसी विद्यालय में पढ़ने आए बच्चों को झाडू़ लगाते देखते हैं। क्या गरीबों के बच्चों का पढ़ने के लिए झाड़ू भी लगानी पड़ेगी। वैसे तो शिक्षा अधिकार अधिनियम में बच्चे को शिक्षा का अधिकार दिया गया है लेकिन इस अधिकार को पाने के लिए झाड़ू लगानी पड़े यह कहां का न्याय है। पढ़िये अमर उजाला की पड़ताल।

समय सुबह 7.20 बजे
प्राथमिक विद्यालय कुड़रिया
विद्यालय गेट पर ताला लटका था। कुछ बच्चे गेट के बाहर विद्यालय खुलने का इंतजार कर रहे थे। दुबारा 7.35 बजे पहुंचने पर विद्यालय खुला मिला। विद्यालय में केवल शिक्षामित्र सोनी तिवारी उपस्थित मिली। तीन कक्षाओं के कमरे खुले थे, जिनमें बच्चे झाड़ू लगा रहे थे। प्रधानाध्यापक योगेंद्र दोहरे के अलावा सहायक अध्यापिकाएं निशि गुप्ता व बेबी राजपूत और अंडर ट्रेनिंग टीचर रवि में से 8 बजे तक कोई भी नहीं आया। विद्यालय में 99 बच्चे नामांकित बताए गए। धीरे-धीरे 37 बच्चे उपस्थित हुए। ग्रामीणों ने बताया कि यह विद्यालय नित्य देर से खुलता है इसीलिए बच्चे भी देर से ही आते हैं।

समय सुबह 11 बजे
प्राथमिक विद्यालय नगला बनी
प्रधानाध्यापिका उमादेवी बरामदे में रजिस्टर में लिखापढ़ी कर रही थीं। अंडर ट्रेनिंग टीचर लता कुमारी पुराने विद्यालय भवन में खेल रहे कुछ बच्चों को लेकर आ रही थी। दो कक्षाओं में बच्चे बैठे खेलकूद में मग्न थे। सहायक अध्यापिका मीरा गुप्ता, अंडर ट्रेनिंग शिक्षक नेहा यादव व अंजली में से अंजली मेडिकल अवकाश पर हैं जबकि अन्य दोनों दिखाई नहीं दीं। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के सर्वे पर गई हैं। विद्यालय में मिडडे-मील अभी बनना शुरू नहीं हुआ है। कक्षा चार के अभिषेक व कक्षा पांच की स्नेहलता ने बताया कि इस बार एक भी दिन उनके विद्यालय में खाना नहीं बना है।

समय 11.10 बजे
प्राथमिक विद्यालय बकेवर द्वितीय
बीआरसी के बगल से स्थित इस विद्यालय में दो कक्षाओं में मौजूद बच्चे शोर मचा रहे थे। अमर उजाला की टीम को देख प्रधानाध्यापक जयवीर सिंह आए और बच्चों को शांत कराने लगे। चार सहायक अध्यापिकाओं में से मधुमाला और अल्का बरामदे में बैठी कुछ लिखापढ़ी कर रही थीं। रेखादेवी व अल्का पोरवाल के बारे में बताया गया कि दोनों सर्व शिक्षा अभियान के सर्वे पर गई हुई हैं।

समय 11.20 बजे
जूनियर विद्यालय बकेवर द्वितीय
प्रधानाध्यापक कोमल सिंह बरामदे में बैठे थे। कक्षा 6, 7 व 8 के बच्चे कमरे में मिडडे-मील खा रहे थे। देर से मिडडे-मील दिए जाने के संबंध में सहायक अध्यापिका उमादेवी ने बताया कि गैस सिलेंडर खत्म हो गया था। उसको भरवाने में समय लगा। इस कारण खाना देर से बन सका। विद्यालय में कार्यरत सहायक अध्यापिका स्नेहलता के विद्यालय में मौजूद न होने के संबंध में बताया गया कि वह सर्व शिक्षा अभियान के सर्वे में गई हैं।

सर्वे कहीं बहाना तो नहीं
परिषदीय विद्यालयों में गायब मिलने वाले शिक्षक शिक्षिकाओं के संबंध में एक ही जवाब मिलता है कि वह सर्व शिक्षा अभियान के सर्वे पर गए है। नियमानुसार इस कार्य को विद्यालय समय के बाद करने क ी व्यवस्था है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। ऐसे में सर्वे कहीं बहाना तो नहीं।

विद्यालयों की सफाई की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत में नियुक्त सफाई कर्मी की है। बच्चों से झाडू़ लगवाना गलत है। शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाती है। सुबह के समय सभी विद्यालय एक साथ खुलते हैं तो एक साथ उनकी सफाई नहीं हो सकती। इसके लिए विद्यालय बंद होने पर सफाईकर्मी को सफाई करनी चाहिए। सर्व शिक्षा अभियान के तहत छूटे बच्चों के चिह्नीकरण का कार्य कराया जा रहा है। यह कार्य विद्यालय समय के बाद किए जाने को कहा गया है-शिवप्रसाद यादव, बीएसए इटावा

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