कमाई का शार्टकट दिखाता अपराध की राह

Etawah Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
केसहिस्ट्री-1
मैनपुरी फाटक की रहने वाली अनुपम पाल से बीते बुधवार को बाइक सवार तीन किशोरों ने पर्स लूट लिया। गाड़ी नंबर से पुलिस ने पड़ताल की तो इस लूट की वारदात में कक्षा-9 के दो छात्र व एक अन्य किशोर शामिल निकला। उन्होंने खर्चों की पूर्ति के लिए वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
केसहिस्ट्री-2
कुछ समय पूर्व नशे में धुत पांच छात्रों ने पहले स्टेशन बजरिया के होटल पर खाना खाया। बाद में उसकी गोलक से रुपए लूट कर भाग निकले। एक को क्षेत्रीय लोगों ने पकड़ कर धुना तो उसने अन्य लड़कों के नाम बताए।

इटावा। लूट, छिनैती, चेन स्नैचिंग की बढ़ती वारदातों पर नजर डालें तो इन अपराधों को अंजाम देने वाला आज का युवा वर्ग बहुतायत है। इन अपराधों को पेशेवर लुटेरों के साथ स्कूल-कालेज के छात्र व संपन्न परिवारों के बेटे अंजाम दे रहे हैं। बढ़ती जरूरतों के लिए घर से मिला खर्चा पूरा नहीं पड़ता तो कमाई के लिए अपराध का शार्टकट रास्ता अपना लेते हैं। आंकड़े बताते हैं कि राहजनी, लूट और छिनैती की वारदातों में ज्यादातर किशोर वर्ग का हाथ होता है। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो युवाओं में बढ़ रही अपराध की प्रवृत्ति नशे के साथ-साथ अन्य जरूरतों को पूरा करने को लेकर है। इसके लिए उनके अभिभावक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।

अपराध की दुनिया में बढ़ते कदम
युवाओं में बढ़ रहे नशे की लत, ग्लैमर के साथ रहन सहन की इच्छा, गाड़ी व मोबाइल का शौक समेत तमाम वजह हैं जो उन्हें अपराध करने को उकसाते हैं। हिंसात्मक फिल्में और क्राइम पेट्रोल जैसे कार्यक्रम युवाओं को शातिर बना रहे हैं। मनोवैज्ञानिक व समाजशास्त्री भी स्वीकारते हैं कि फिल्में और धारावाहिक युवाओं के मस्तिष्क को प्रभावित कर रहे हैं।

अभिभावक भी हैं जिम्मेदार
आज के आधुनिक दौर में अधिकांश अभिभावकों का ध्यान कामकाज तक रह गया है। घर परिवार में क्या हो रहा है इसकी उन्हें कतई फिक्र नहीं है। जहां पति-पत्नी दोनों कमाने वाले हैं वहां की स्थिति चिंताजनक है। काम के बोझ तले दबे अभिभावक बच्चों पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं। अंकुश न होने से वह अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं।

पाकेट खर्च वही, खर्चे बढ़े
हाथों में मोबाइल और बाइक, रहन सहन की महंगी फिल्मी स्टाइल भी किशोरों को अपराध की ओर धकेलने का प्रमुख कारण है। लड़कों के खर्च तो बढ़े हैं लेकिन उनके अभिभावक उनके खर्चे उठा नहीं पा रहे हैं। पाकेट मनी के नाम पर चंद रुपए मिलते हैं लेकिन खर्चा अधिक होता है। ऐसे में आय का यह शार्टकट किशोर अपना लेते हैं।

आप रहे सर्तक, ताकि ऐसा न हो
अभिभावक टीनएज में पहुंचे अपने बच्चों की हरकतों पर पूरी निगाह रखें। जितना हो सके उसे भौतिकतावादी समाज से दूर रखें। समय-समय पर उसके दोस्तों की भी पड़ताल करें। स्कूल, कालेज के साथ ट्यूशन पर नजर रखें। बच्चे की दिनचर्या की पूरी जानकारी रखें और देखें वह कहां जाता है और किस-किस से मिलता है। आपकी छूट घातक हो सकती है।

अपराध की ओर युवाओं के बढ़ते कदम के लिए नशा प्रमुख कारण है। महंगे नशे की लत, दोस्तों की संगत, रहन सहन का महंगा स्टाइल उन्हें गलत रास्ते पर ले जाता है-डॉ. शैलेंद्र यादव, मनोरोग चिकित्सक

किशोर वर्ग व अभिभावक आत्मकेंद्रित हो गए हैं। मौज मस्ती, दिखावे की होड़ और भौतिक संसाधनों को जुटाने के लिए किशोर अपराध की दुनियां में जा रहे हैं-डा. उदयवीर सिंह, प्रोफेसर समाजशास्त्र

गाड़ी-मोबाइल के साथ बढ़ते हुए खर्चे इसके लिए जिम्मेदार हैं। अधिकांश परिवारों की आर्थिक स्थिति बच्चों के मौजमस्ती के खर्चे उठाने में सक्षम नहीं है-डा. मौकम सिंह, प्राचार्य केकेडीसी

गलत संगत, नशे की लत व हाईफाई खर्चे किशोर व युवाओं को अपराध की ओर धकेल रहे हैं। अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं-अविनाश सिंह, अभिभावक

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