मानसून की देरी से निराश न हों

Etawah Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
इटावा। मानसून के देर से आने से धान किसान निराश न हों। वह दक्षिण भारत की श्रीपद्धति के साथ धान की अच्छी पैदावार पा सकते हैं। उप कृषि निदेशक प्रसार जी राम ने बताया कि कम बारिश में श्रीपद्धति धान की पैदावार के लिए कारगर है।
श्रीपद्धति के जरिए 8 से 12 दिन की दो से तीन पत्तियों वाली एक पौध 25-25 सेंटीमीटर पंक्ति एवं पौधे की दूरी पर दो-तीन सेंटीमीटर की गहराई पर रोपाई करें। इस विधि में एक हेक्टेयर की रोपाई के लिए एक हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल की पौध पर्याप्त है। 5 से 6 किलोग्राम बीज एक हेक्टेयर की रोपाई के लिए पर्याप्त है। नर्सरी में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग न कर जैविक ढंग से खेती की जाए और खरपतवार नियंत्रण के लिए कोनीवीडर का प्रयोग करें। इस विधि में पानी की अधिक जरूरत भी नहीं है सिर्फ खेत को किचड़नुमा करके पौध रोपी जा सकती है। लेकिन ध्यान रहे पौध खेत के पड़ोस में ही डाले जिससे पौधे के एक से दो घंटे के भीतर रोपा जा सके।
तीस जून के बाद बारिश होने पर सरजू 52, नरेंद्र 359, पीएनआर 381, नरेंद्र धान 2026 और नरेंद्र धान 312 का चयन करें। वर्षा 10 जुलाई के बाद प्रारंभ हो तो नरेंद्र 97, नरेंद्र 118, नरेंद्र 80, गोविंद, साकेत 4, आईआर 36 और पंत 12 बरानी दीप, शुष्क सम्राट और नरेंद्र लालमती का चयन करें। विलंब की दशा में दस अगस्त तक सीधे बुवाई की जाए। उन्होंने बताया कि सूखे के प्रति सहनशीलता बढ़ाने के लिए 2.5 किग्रा यूरिया एवं 2.5 किग्रा पोटाश का छिड़काव करें।

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