पूर्व बीएसए हरीसिंह शाक्य शाक्य निलंबित

Etawah Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
ऊसराहार (इटावा)। शिक्षकों के गलत समायोजन से चर्चा में आए तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षाधिकारी एवं वर्तमान में जेपीनगर डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर तैनात हरीसिंह शाक्य को शासन ने निलंबित कर दिया। उनके द्वारा किए गए समायोजन में कई विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए थे। यही नहीं उनकी तैनाती के समय उन पर संहिता के उल्लंघन के भी आरोप लगते रहे। 26 मार्च को जिलाधिकारी ने बीएसए कार्यालय इटावा पर छापा मारकर अभिलेखों को अपने कब्जे में लेकर अनियमितताओं की रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा द्वारा भेजे गए निलंबन आदेश में कहा गया है कि उनकी जिले में तैनाती के समय शिक्षकों के किए गए समायोजन में गलत तथ्य पेश करके शिक्षकों को शिक्षा अधिकार अधिनियम के निर्देशों की अवहेलना करते हुए समायोजित कर दिया गया था। साथ ही शिक्षकों के पदस्थापन में भी शासनादेशों के विपरीत कार्य किया गया था। हरीसिंह शाक्य का कार्यकाल 30 अगस्त 2011 से 27 मार्च 2012 तक रहा। उनके कार्यकाल में हुए शिक्षकों के तबादलों के बाद विकास खंड ताखा का उच्च प्राथमिक विद्यालय रुद्रपुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय संतोषपुर पचार सहित कई अन्य विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए थे। इसके साथ ही भवन निर्माण में भी भ्रष्टाचार उजागर हुआ था। तैनाती के समय उन पर अपने रिश्तेदारों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने के भी आरोप लगते रहे थे। यही नहीं आचार संहिता में ड्रेस वितरण का कार्य जिले के विद्यालयों में होने पर सपा महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने रोक लगाई थी। इस संबंध में ज्योतिबा फुले नगर के डायट प्राचार्य डा. प्रवेश कुमार ने बताया कि विशेष सचिव बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश का पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
- बसपा के टिकट पर पत्नी लड़ी थीं चुनाव
तत्कालीन बीएसए हरी सिंह शाक्य की पत्नी रमा शाक्य बसपा प्रत्याशी के तौर पर मैनपुरी जनपद की सदर सीट से चुनाव भी लड़ी थीं। हालांकि चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव के समय उन पर पत्नी के प्रचार के आरोप लगते रहे थे। इसकी शिकायत भी चुनाव आयोग से की गई थी।
- क्या रद्द होंगे बीएसए के फैसले
ऊसराहार (इटावा)। निलंबन के बाद अब सवाल है कि तत्कालीन बीएसए द्वारा शिक्षकों के तबादले व समायोजन के साथ शासनादेश के विपरीत हो निर्णय लिए गए थे वह रद्द होंगे या नहीं।
बीएसए को निर्णयों को जांच में गलत पाया गया है तो उनके कार्यकाल के दौरान हुए तबादले की प्रक्रिया रद्द होने के बाद वह सभी शिक्षक वापस अपने पुराने विद्यालयों में ही शिक्षक कार्य कर सकेंगे। यदि ऐसा होता है तो तबादलों के बाद शिक्षकविहीन हुए विद्यालयों में दोबार फिर से शिक्षक तैनात हो सकेंगे। इस बारे में एडवोकेट प्रमोद कुमार शाक्य का कहना है कि जिन आरोपों में कोई अधिकारी निलंबित हुआ है, तो स्पष्ट है कि उनके फैसलों में अनियमितताएं रहीं होंगीं। वहीं एडवोकेट ज्ञानेंद्र अवस्थी का कहना है कि यदि तबादलों की प्रक्रिया गलत पाए जाने पर तत्कालीन बीएसए निलंबित हुए हैं तब फिर तबादलों को भी रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही वह पूरी प्रक्रिया ही निरस्त होनी चाहिए। वहीं सेवानिवृत्त राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अभिलाष सिंह यादव का कहना है कि जनपद में हुए समायोजन एवं तबादलों की प्रक्रिया को निरस्त करके शिक्षक विहीन पड़े हुए विद्यालयों में शिक्षकों को तैनाती दे देनी चाहिए।

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