आलू-गेहूं के बाद अब धान पर संकट

Etawah Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
इटावा। देरी से आया मानसून अबकी धान फसल किसानों की कमर तोड़ेगा। आलू और गेहूं के बाद अब धान पर संकट मंडरा रहा है। जुलाई की शुरुआत हो गई है, लेकिन अभी तक जिले के लोग बारिश को तरस रहे हैं। खेत खलिहान प्यास से व्याकुल हैं। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अगर दस दिन के भीतर जोरदार बारिश न हुई तो धान किसानों को 35 प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है। खेतों पर पड़ी धान की पौध भीषण गर्मी के कारण सूख रही है और परेशान हाल किसान आसमान की ओर निहार रहा है। अगर आंकडे़ देखें तो जून के अंत तक सामान्य वर्षा 83.3 एमएम होनी चाहिए थी, लेकिन मानसून की देरी के कारण अब तक बमुश्किल 18 एमएम वर्षा ही रिकार्ड की गई है।
जिले की मुख्य पैदावार धान है। जिले के 96 हजार हैक्टेयर कृषि क्षेत्र में अकेले 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में धान की पैदावार होती है। शेष हैक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की अन्य फसलें पैदा की जातीं हैं। इस बार मानसून की बेरुखी ने धान किसानों की कमर तोड़ दी है। पानी न बरसने से किसान पौध की रोपाई भी नहीं कर पा रहे हैं। 15 जुलाई तक धान की रोपाई हो जानी चाहिए थे, लेकिन मानसून के साथ न देने से यह संभव नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 15 फीसदी तक का नुकसान धान किसानों को हो चुका है।
- दस दिन में बारिश न हुई तो भारी नुकसान
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो धान की रोपाई समय से न होने और मानसून के न आने से अब तक 15 फीसदी तक का नुकसान हो चुका है। अगर मानसून 5 दिन बाद आया तो यह नुकसान बढ़कर 20 से 25 फीसदी तक हो जाएगा। मानसून में अगर दस दिन की देरी और हुई तो धान उत्पादन में 35 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है। रोपाई देरी से होने के कारण चावल पतले होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
- अन्य फसलें भी हो रहीं प्रभावित
मानसून के साथ न देने के साथ धान ही नहीं खरीफ की अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। कृषि विशेषज्ञ का कहना है मानसून के साथ न देने के कारण बाजरा, मक्का, अरहर, जुनरी आदि खरीफ की फसलें भी प्रभावित होंगी।
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- तापमान कहां से लाओगे
फोटो-2-इं.भूपेंद्र सिंह चौहान
मानसून में देरी से धान की फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। बरसात न होने से समय से धान की पौध की रोपाई नहीं हो पा रही है। किसान सिंचाई के साधनों से खेतों में पानी का इंतजाम तो कर लेंगे। लेकिन फसल के अनुकूल तापमान कहां से लाएंगे। इस तापमान में खेतों में भरे खौलते पानी में रोपी गई पौध ठीक से डेवलप नहीं होगी तथा तेज धूप के कारण पत्तियां झुलस जाएंगी। अगर पांच रोज में जोरदार बारिश न हुई तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मानसून के समय से न आने से उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होगी।
-इं. भूपेंद्र सिंह चौहान
विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र
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-समझ नहीं आ रहा कैसे रोपें
फोटो-3-रामकिशोर
सुबह-शाम जमकर सिंचाई करने के बाद भी धान की पौध सूख रही है। ऐसे में बरसात न होने से खेतों में धूल उड़ रही है, अगर नलकूप से पानी भरकर पौध रोपी भी जाए तो अधिक तापमान और तेज धूप से फसल प्रभावित होगी। फसल रोपाई में हो रही देरी और मौसम के साथ न देने से किसानों को भारी नुकसान होगा।
रामकिशोर, किसान कटेखेड़ा गांव

-फसलों पर है संकट
फोटो-4-बनवारी लाल
मानसून में देरी और अधिक तापमान से धान ही नहीं खरीफ की सभी फसलों पर संकट है। पानी की अधिक जरूरत होने से धान की फसल ज्यादा प्रभावित हो रही है। अगर समय रहते मौसम ने किसानों पर कृपा दृष्टि नहीं डाली तो धान किसानों को नुकसान के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लगेगा।
बनवारीलाल, किसान कांधनी गांव

- सैकड़ों किसान नहीं रोपेंगे धान
बकेवर (इटावा)। अनुकूल मौसम न होने से परेशान किसानों ने अब धान की पौध न रोपने का फैसला कर लिया है। बात अगर कुड़रिया रजवाहा की करें तो यहां दो सौ से अधिक किसानों ने धान की जगह दूसरी फसल पैदा करने का निर्णय कर लिया है। उदाहरण के तौर पर कुड़रिया निवासी ऋषीराज तिवारी 50 बीघा जमीन पर धान की पैदावार करते हैं, लेकिन इस बार मौसम का साथ न देने से उन्होंने धान की खेती करने की इच्छा त्याग दी है।

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