मुख्यमंत्री कोष से मदद की चाह बढ़ी

Etawah Updated Sat, 30 Jun 2012 12:00 PM IST
इटावा। सपा के सत्ता में आने के बाद से गृह जनपद के लोगों की मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद की उम्मीदें बढ़ी हैं। महज तीन माह में ही 140 प्रार्थना पत्र आए हैं। इनमें से 10 लोगों को इलाज की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। 80 प्रार्थना पत्र जांच के बाद डीएम की संस्तुति के साथ शासन को भेजे जा चुुके हैं। शेष की जांच जारी है। आमतौर पर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से गंभीर प्रकृति के मामलों में अनुदान से मदद की जाती है। यह एक लाख रुपए की भी हो सकती है और पांच लाख रुपए की भी, लेकिन इस कोष से मदद लेना सहज नहीं है। अब चूंकि सपा की सरकार सत्ता में है तो जिले के लोगों को आसानी से आर्थिक मदद होने की उम्मीदें जगी हैं। यही वजह है कि अप्रैल से 25 जून तक 140 प्रार्थना पत्र अनुदान के संबंध में मिले हैं। इनमें अधिकांश प्रार्थना पत्र सीधे शासन के अनुभाग चार भेजे गए। कुछ प्रार्थना पत्र जिला प्रशासन को सौंपे गए हैं। इन सभी प्रार्थना पत्रों की जांच जिला प्रशासन करवाता है। प्रार्थना पत्र संस्तुति के साथ लखनऊ अनुभाग चार के सचिव को प्रेषित कर दिए जाते हैं। संस्तुति के बाद भी यह शासन पर निर्भर करता है कि किसे अनुदान मुहैया कराया जाए। प्रार्थना पत्र चाहे लखनऊ भेजा जाए या जिला प्रशासन को दिया जाए। सभी प्रार्थना पत्रों की जांच जिला प्रशासन करता है। इसके लिए तहसील स्तर से संबंधित पीड़ित व्यक्ति के दर्शाए गए तथ्यों की जांच होती है।
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सुतियानी व ब्रह्माणी के मामलों में मिली मदद
- विवेकाधीन कोष से अब तक दो प्रमुख मामलों में मदद की जा चुकी है। एक सुतियानी दुर्घटना में मरे छह लोगाें के परिवारों को दो दो लाख रुपए और ब्रह्माणी देवी मंदिर पर झंडा चढ़ाने को लेकर हुए विवाद में मरे तीन लोगों के परिजनों को पांच पांच लाख रुपए दिए गए हैं। इसके अलावा 10 प्रार्थना पत्रों पर शासन स्तर से इलाज के वास्ते संबंधित चिकित्सा संस्थान को 80 हजार रुपए से दो लाख तक मुहैया कराए गए हैं।
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इन कारणों से मिल सकता है अनुदान
- मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के तहत जो प्रावधान है, उसके अनुसार असहाय व्यक्ति, विकलांग व्यक्ति, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यो में रत संस्थाओं, बीमारी से पीड़ित निर्धन व्यक्ति, निराश्रित विधवा आदि अन्य, जघन्य हत्याओं,अपराधों एवं दुर्घटनाआें के शिकार लोगो या उनके परिजनों, भीषण अगिभनकांड, भूस्खलन, हिमपात आदि दैवीय आपदा से पीड़ित लोगों के अलावा मुख्यमंत्री के विवेकानुसार लाभार्थियों को अनुदान उपलब्ध कराया जा सकता है।

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