रोमांचक होगा चेयरमैनी का चुनाव

Etawah Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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इटावा। नगर पालिका परिषद इटावा के चेयरमैन पद के चुनाव में समाजवादी पार्टी के खुलकर मैदान में आ जाने से चुनाव रोमांचक दौर में पहुंच गया है। बेशक सपा ने अपने अधिकृत प्रत्याशी की घोषणा करने के बाद अपने दल के उतरे कई प्रत्याशियों को मैदान से हटा लिया। बावजूद इसके कई प्रत्याशी पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में डटे हैं। फिलहाल चुनाव में सभी प्रत्याशियों के लिए संघर्ष की स्थिति है। जिनमें टक्कर है वे दो प्रत्याशी ऐसे हैं जो सपा से जुड़े हैं। एक को सपा ने अधिकृत कर दिया, दूसरा सपा से जुड़ा है लेकिन सपा का प्रत्याशी नहीं है। मतलब पार्टी नहीं खुद का जनाधार। बावजूद इसके दूसरे को किसी भी मायने में कम नहीं आंका जा सकता। इन दो प्रत्याशियों के बीच भाजपा प्रत्याशी अपनी टांग फंसाने में सफल हो गए हैं।
निकाय चुनाव को लेकर सपा ने बगैर सिंबल के सभी को चुनाव लड़ने की छूट दे दी थी। इसी कारण चुनाव मैदान में सपा से जुड़े प्रत्याशियों की संख्या अधिक हो गई थी। नाम वापसी के दिन कुछ ने सपा नेताओं के दबाव में नाम वापस ले लिए थे। फिर भी सपा से जुड़े आधा दर्जन प्रत्याशी मैदान में रह गए थे। जैसे जैसे चुनाव गति पकड़ता गया वैसे वैसे सपा में अधिकृत प्रत्याशी घोषित करने का दबाव बढ़ता गया। लिहाजा सपा को नफीसुल हसन अंसारी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित करना पड़ा। पार्टी के नेता खुलकर चुनाव मैदान में निकल आए। सपा नेताओं ने एक के बाद एक तीन प्रत्याशियों को नफीसुल के समर्थन में बिठाने में सफलता हासिल कर ली। इसके बावजूद भी अधिकृत प्रत्याशी सहित तीन लोग सपा से जुड़े मैदान में डटे रहे।
जब जनता के माध्यम से चेयरमैन चुने जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी तब इटावा नगर पालिका परिषद क्षेत्र सवर्ण बाहुल्य क्षेत्र कहलाता था और यही वजह रही थी कि पहले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी जसवंत सिंह वर्मा ने अपना पार्टी का परचम फहरा दिया था। लेकिन बाद में बदले परिसीमन में लाइन पार क्षेत्र और उसके आसपास के कई गांव नगर पालिका से जुड़ गए तो इस सीट का स्वरूप भी बदल गया। लाइन पार क्षेत्र जुड़ने से पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या में काफी इजाफा हो गया।
इस क्षेत्र में सवर्ण, मुस्लिम और पिछड़ावर्ग मतदाता लगभग बराबरी की स्थिति में पहुंच गया है। सपा के अधिकृत प्रत्याशी नफीसुल अंसारी मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के जरिए जीत का सपना संजोए हुए हैं वहीं भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र गुप्ता सपा की ओर से अधिकृत प्रत्याशी के अलावा दो अन्य प्रत्याशियों के मैदान में होने और सवर्ण मतदाताओं के जरिए पार्टी की जीत को दोहराने की फिराक में हैं। चुनाव के रोमांचक होने का कारण निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सपा से जुड़े कुलदीप गुप्ता संटू का चुनाव मैदान में डटे रहना है। उनका यह दूसरा चुनाव है। इससे पहले वह वर्ष 2000 में बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं। लिहाजा शहरी मतदाताओं में अपनी अच्छी पकड़ के नाते वह चुनाव मैदान में मजबूती से डटे हुए हैं। कहा तो यह जा रहा है कि संटू को भी कुछ सपा नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त है।

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