‘पोलिया दवा पिला बच्चों को करें रोगमुक्त’

Etawah Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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डीएम ने किया पोलियो अभियान का शुभारंभ
इटावा। जिलाधिकारी पी गुरुप्रसाद ने रविवार को जिला अस्पताल में एक बच्चे को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि नवजात से 5 साल तक के सभी बच्चों को पोलियों की खुराक अवश्य पिलाएं। इसमें किसी प्रकार की उदासीनता आपके बच्चे को भविष्य बिगाड़ सकती है।
जिला चिकित्सालय में पोलियो बूथ के उद्घाटन के बाद चार दर्जन बच्चों को पोलियो खुराक पिलाई गई। उन्होंने कहा कि कि रविवार को बूथ पर दवा पीने से जो बच्चे वंचित रह जाएं, उसे डोर टू डोर टीम से दवा अवश्य पिलवाएं। उन्हाेंने सीएमओ को निर्देश दिए कि बूथ कवरेज के बाद बैठक कर समीक्षा कर लें कि चिह्नित बच्चों में कितने बच्चे दवा पीने से छूट गए है। उन्हें संबंधित क्षेत्र में सुपरवाइजरों को निर्देशित कर दें कि इन्हें पोलियो की दवा अवश्य पिलवाते हुए संतृप्त बच्चों की सूचना भेजी जाए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसएच जायसी ने सभी संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर अधिक से अधिक पोलियो बूथ का कवरेज कराएं। बूथ पर किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दें और कहीं कोई गड़बड़ी पाएं तो तत्काल संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी संबंधित एमओआईसी को निर्देश दिया कि ईंट-भट्टा झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों के बच्चों को भी शत-प्रतिशत आच्छादित करें। इस अवसर पर सीएमएस डा. वीएस अग्निहोत्री, सीएमएस महिला डा. गीता जोशी, डा. एएस कनौजिया, जिला सूचना अधिकारी दयाशरण वर्मा आदि मौजूद रहे।
उधर, इकदिल में पल्स पोलियो दिवस पर नगर के चार बूथों पर 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियों की खुराक पिलाई गई। सुपर वाइजर मिथलेश कुमारी सक्सेना, सुमित कुमार ने बूथों पर जाकर निरीक्षण किया। जिसमें नगर के आदर्श प्राथमिक विद्यालय, ज्ञानचंद्र इंटर कालेज आदि बूथों पर बच्चों को पोलियों की खुराक पिलाई गई।
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बूथों पर बच्चों की संख्या न के बराबर
जसवंतनगर (इटावा)। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अथक प्र्रयासों के बावजूद पोलियो बूथों पर बच्चों की संख्या न के बराबर देखी गई। अधिकांश स्कूलों के ताले तक नहीं खुले खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री के गांव सैंफ ई के स्कूल में भी मिडडे मील नहीं बना न ही प्रधानाध्यापिका मौजूद मिलीं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसवंतनगर के क्षेत्र में 150 पोलियो बूथ बनाए गये थे जिसमें 80 फीसदी से ज्यादा बूथों पर मिड डे मिल नहीं बना। इन पोलियो बूथों पर अधिकांशत: आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पंजीरी वितरित करते देखा गया।
भले ही जिलाधिकारी ने कुछ दिन पहले पोलियो अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित अधिकारियों की बैठकें की हों। लेकिन जसवंतनगर क्षेत्र में पोलियो अभियान फ्लाप दिखा। पोलियो बूथों पर सुबह के समय तो थोडे़ बच्चे दिखे, लेकिन दस बजे के बाद इन बूथों पर सन्नाटा पसरा रहा। पोलियो बूथों पर बच्चों के ज्यादा न पहुंचने की वजह स्कूलों का न खुलना तथा उनमें मिडडे मील न बनना भी मुख्य वजह रहा। स्कूलों के न खुलने से कई बूथों पर कुर्सियां भी नही थीं और छाया में बूथ लगाने को मजबूर होना पड़ा।
बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों ने प्रशासनिक अधिकारियों के आदेशों व निर्देशों की अवहेलना करते हुए मिडडे मील वितरित करने की बात तो दूर स्कूल तक नहीं खोले। क्षेत्र में कई पोलियो बूथों पर ऐसी ही स्थिति देखी गई। जिन स्कूलों में मिड डे मील नहीं बना उनमें प्राथमिक विद्यालय बाउथ, नगला विशुन, नगला रामसुन्दर, राजपुर, तिजौरा, तमेरी, निजामपुर, मलाजनी, बनकटी, नगला पुल, सिरहौल, सिसहाट , भगवानपुरा, धौलपुर, मीरखपुर पुठिया, धनुवा, ख्ेाडा बुजर्ग, रूकुनपुरा, फतेहपुरा, आलई, हजरतपुर, कैस्त, बीबामऊ, नागरी, महामई, कुडाखर, मलुपुरा, हरकुपुरा, तथा सैंफई क्षेत्र के प्राइमरी पाठशाला आदि शामिल हैं। इसी तरह कुइया, उझियानी, पिनडारी में भी स्कूल बंद पाए गए। ग्राम कैस्त मे स्कूल बंद पाए जाने पर जब ग्राम प्रधान राजकिशोर से पूछा गया तो बोले, अध्यापक उनकी नहीं सुनते हैं। यहां का विद्यालय बंद था तथा काफी गंदगी थी। लेकिन अंागनबाड़ी कार्यकत्रियां, सहायिकाए तथा आशाएं मौके पर मौजूद थीं।
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सैंफई सहित अन्य स्कूलों में मिड डे मील बनता नहीं मिला, न ही स्कूल खुले मिले। इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी।
भरतकिशोर, बूथ सुपरवाइजर

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