डेढ़ लाख पेड़ों की छाया में रहेगा जंगल का राजा

Etawah Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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इटावा। समय का परिवर्तन देखिए। एक जमाना था जब इटावा के बीहड़ में स्थित फिशर फारेस्ट अंग्रेजों के लिए वन्य जीवों की शिकारगाह के रूप में कुख्यात था। अब यही फिशर फारेस्ट लायन सफारी के तौर पर वन्य जीवों के संरक्षण के लिए तैयार हो रहा है। यहां न सिर्फ वन्य जीवों का संरक्षण होगा, बल्कि जल-जमीन-जंगल के अलावा अन्य प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित किया जाएगा। इटावा का लायन सफारी क्षेत्र पर्यटन को बढ़ावा तो देगा ही, पर्यावरण संतुलन को भी बनाए रखने में महती भूमिका निभाएगा।
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दरअसल नए मास्टर प्लान के मुताबिक 135 हेक्टेयर लायन सफारी क्षेत्र में जंगल के राजा शेर और उसके परिवार को छांव देने के लिए डेढ़ लाख पेड़ लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ में मास्टर प्लान को देखा और खुशी जाहिर करते हुए इसे हरी झंडी दे दी।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक उम्मीद है कि नया मास्टर प्लान इसी सप्ताह राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सामने पेश किया जाएगा। इस लायन सफारी प्रोजेक्ट का ले आउट लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विभूति नारायण और उनकी टीम ने तैयार किया है जबकि मास्टर प्लान चंबल सेंचुरी क्षेत्र के डीएफओ सुॅजाय बनर्जी ने बनाया है। इस मास्टर प्लान को तैयार करने में चार माह से अधिक का समय लगा है। लायन सफारी प्रोजेक्ट को फिलहाल दो हिस्सों में बांटकर काम किया जा रहा है। एक जमीनी स्तर पर और दूसरा कागजी स्तर पर। दोनों काम युद्धस्तर पर जारी हैं। कागजी स्तर का काम मास्टर प्लान, ले आउट लगभग पूर्ण हो चुका है। जमीनी स्तर का काम नक्शे के मुताबिक शुरू कर दिया गया है।
लायन सफारी क्षेत्र 150 हेक्टेयर के बजाए 135.70 हेक्टेयर
लायन सफारी क्षेत्र भौतिक नापजोख के बाद 150 हेक्टेयर के बजाए 135.70 हेक्टेयर निकला है। शेरों को घने जंगल का अहसास कराने और ठंडी छांव के लिए इस 135 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 1100 पेड़ लगाए जाएंगे। ये सभी पेड़ कांटूर बुआन नाली तकनीक से लगाए जाएंगे। डीएफओ सुजॉय बनर्जी के मुताबिक सफारी क्षेत्र में लगाए जाने वाले सभी पेड़ देशी प्रजाति के होंगे जो अपने आसपास ही पाए जाते हैं। इनमें सेमल, गूलर, बरगद, बबूल, पाकड़, शीशम, कैथा, नीम, जंगल जलेबी, बेर, कंजी, खैर, अरू, रेआंस, छोकर समेत दो दर्जन प्रजातियों के पेड़ होंगे। इन सभी पेड़ों की जड़ें गहरी होती हैं जो बीहड़ी क्षेत्र में अपने आप को बचाए रखने में सफल रहेंगे।
झांसी से मंगाई गई घास
डीएफओ सुजॉय बनर्जी ने बताया कि बीहड़ की बजरी युक्त जमीन को हरा भरा करने के लिए झांसी के ग्रास रिसर्च इंस्टीट्यूट से 20 किलो घास मंगवाई गई है। यह घास जल्द ही समतल हो रहे मैदान में रोपी जाएगी। ताकि आने वाले मानसून का फायदा लिया जा सके। उन्होंने बताया कि घास लगाने से मिट्टी का क्षरण रुकेगा और आगे के काम में लाभ पहुंचाएगा। उन्होंने बताया कि झांसी से मंगवाई गई घास की अपनी विशेषता है।
इटावा के आसपास बढ़ेगा जलस्तर
लायन सफारी क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख पेड़ लगाए जाने से इटावा के आसपास का पर्यावरण बेहतर होगा। यहां इतनी तादात में पेड़ लगने से जंगल की जमीन का क्षरण रुकेगा जबकि बरसाती पानी संरक्षित होकर जमीन के अंदर पहुंचेगा। इससे यहां के जलस्तर में सुधार होगा। आने वाले 10 वर्षों में अपने आप यहां जलसंकट दूर हो सकता है। फिलहाल इटावा के बीहड़ में 40 से 50 फुट नीचे पानी है।
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