नहीं जागे तो सांस लेना होगा मुश्किल

Etawah Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
इटावा। पर्यावरण संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले वृक्षों पर संकट के बादल लगातार मंडरा रहे हैं। जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ जिले में हरियाली का दायरा दिनों दिन घटता जा रहा है। वृक्षों का कटान जारी है जिससे पर्यावरण संतुलन गड़बड़ाने लगा है। जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण व ध्वनि प्रदूषण तरह-तरह की बीमारियों को जन्म दे रहा है। अगर समय रहते सभी ने प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को नहीं समझा और पर्यावरण शुद्धता के महत्व को नहीं जाना तो आने वाले समय में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।
वृक्ष मानव को आक्सीजन के तौर न जीवनदाई गैस प्रदान करते हैं। बदले में मानव वृक्षों का ही कटान कर रहा है। लगातार वृक्षों के हो रहे कटान के कारण पर्यावरण संतुलन गड़बड़ाने लगा है। बीते पांच वर्षों में करीब दस फीसदी वनक्षेत्र का ह्रास हुआ है। वर्तमान में जिले में 18 हजार हेक्टेयर वनक्षेत्र है। जनसंख्या वृद्धि के साथ ही लगातार पेड़ों का कटान जारी है। अगर पेड़ों का कटान इसी तरह जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब वायु प्रदूषण मानव जीवन में खलल डालना शुरू कर देगा।
पौधरोपण से पूरी नहीं होगी जिम्मेदारी
आज वन विभाग सहित कई अन्य सामाजिक संगठन व एनजीओ पर्यावरण के लिए काम कर रहे हैं। पर्यावरण बचाओ अभियान चलाकर पौधारोपण किया जा रहा है। लेकिन सिर्फ पौधारोपण करने से ही जिम्मेदारी पूरी होने वाली नहीं है। वन विभाग के सूत्रों की माने तो हर वर्ष रोपे गए पौधों में 50 फीसदी पौधे देखरेख के अभाव व मौसम के साथ न देने के कारण दम तोड़ देते हैं। वर्ष 2008-09 में वन विभाग द्वारा 11375 पौधे रोपे गए लेकिन इनमें से करीब आठ हजार पौधे नष्ट हो गए। वर्ष 2009-10 में 12850 पौधे रोपे गए जिनमें से 9500 पौधे सूख गए। वर्ष 2010-11 में 11000 पौधे रोपे गए जिनमें से 7 हजार पौधे नष्ट हो गए। इसी तरह 2011-12 में 15000 पौधे रोपे गए जिनमें से करीब आधे पौधे नष्ट हो गए।
जल व ध्वनि प्रदूषण रोकें
वायु प्रदूषण के साथ बढ़ने जल व ध्वनि प्रदूषण को मानव जीवन की सुरक्षा के लिए रोका जाना जरूरी है। वाहनों की बढ़ी संख्या से लगातार ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। वहीं कल कारखानों ने निकलने वाले जहरीले केमिकल से नदियों का पानी दूषित होता जा रहा है। केमिकल युक्त पानी को बोरिंग के जरिए जमीन के भीतर डालना भी खतरनाक है। अगर स्थिति यही रही तो आने वाले समय में जमीन से ही प्रदूषित पानी निकलेगा।
प्रदूषण के साथ लगातार बढ़ रहीं बीमारियां
इटावा। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से तरह-तरह की बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यह कहना है जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. नीलेश का। उनका कहना है कि ध्वनि, वायु, व जल प्रदूषण मानव जीवन के लिए अभिशाप हैं। अगर प्रदूषण पर समय रहते अंकुश न लगा तो आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम भयावह होंगे। बढ़ रहे ध्वनि प्रदूषण के कारण मानव में सुनने की शक्ति प्रभावित हो रही है। चिड़चिड़ापन की प्रवृत्ति बढ़ने के साथ ही मेमोरी क्षमता कम हो रही है। वायु प्रदूषण व जल प्रदूषण के कारण दमा, पीलिया, फेफड़ों से संबंधित सहित कैंसर जैसी घातक बीमारियां जन्म ले रही हैं।

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