पुलिस न पहुंचती तो मारा जाता अशोक

Etawah Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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इटावा। पुलिस की मुठभेड़ में बदमाशों के चंगुल से छूटे अशोक ने बताया कि पुलिस समय पर न पहुंचती तो उसको मार दिया जाता क्योंकि बदमाशों ने 40वे दिन उसको मार देने की योजना बना रखी थी। बदमाशों ने उसे बंधक बनाकर जंगल में रखा था। खाने के नाम पर रोज दो बार तीन रोटी, प्याज, नमक देते थे और रोज पिटाई करते थे।
बताते चलें कि माधौ पैलेस ऐशबाग लखनऊ निवासी रामाधार शुक्ला का बेटा अशोक 20 अप्रैल को कटरा शमशेर खां में रहने वाली विधवा बहन संगीता के घर आया था। 21 अप्रैल को संगीता का देवर सुधीर उर्फ सुनील उसे घुमाने के बहाने घर से ले गया। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला। बहुत खोजबीन के बाद 19 मई को पिता रामाधार ने कोतवाली में सुधीर के खिलाफ बेटे के अपहरण और 18 लाख की फिरौती मांगने का मामला दर्ज कराया। गुरुवार को सिविल लाइन व कोतवाली पुलिस ने डूढ़पुरा के बीहड़ में बदमाशों से मुठभेड़ के बाद अशोक को मुक्त कराया। हालांकि इस मुठभेड़ में एक भी बदमाश पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा।
बदमाशों के चंगुल से छूटकर आए अशोक ने बताया कि सुधीर उसे टेंपो में बिठाकर मलाजनी ले गया। मलाजनी चौराहे पर कुछ देर इंतजार के बाद बाइक पर सवार दो लोग आए। सुधीर ने उससे किसी गांव का नाम लेते हुए कहा कि वहां दो लोगों से रुपए लेने हैं। इसके बाद चारों लोग एक बाइक पर सवार होकर चल दिए। गांव के बजाए वह लोग उसे जंगल में ले गए। वहां पर उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी। दूसरे दिन जब पट्टी खोली गई तो उसने खुद को घने जंगल के बीच एक झाड़ी के नीचे पड़ा पाया। बदमाश उसकी सुबह-शाम पिटाई करते थे। तीन-तीन लोग बारी-बारी से उसकी निगरानी करते थे। पिता से 18 लाख की फिरौती मांगी गई। दिन गुजरते गए। फिरौती न मिलने पर 39वे दिन बदमाशों ने योजना बनाई थी कि कल तक रुपए नहीं आए तो उसे मार दिया जाए। 40वे दिन उसे घी चुपड़ी रोटी दी गई। खाना खाने के बाद वह झाड़ियाें में बंधक पड़ा था कि फायर की आवाज सुनी। बदमाशों की ओर से फायर किया गया। बाद में पुलिस ने फायर किए। इससे बदमाश भाग गए। अशोक का कहना है कि अगर पुलिस न पहुंचती तो उसे मार दिया जाता। घी चुपड़ी रोटी खाने के बाद उसे यकीन हो गया था बदमाश अब उसे मार डालेेंगे।
पांच बदमाशों को पहचाना, दर्ज हुआ मामला
अशोक ने बदमाशों की संख्या 6-7 बताई। उनमें से पांच को पहचान लिया। सुधीर उसे बदमाशों के हाथ सौंपने के बाद दुबारा नहीं दिखा। बहन की ससुराल बाउथ गांव में थी इसलिए उस गांव का रहने वाले अजय सिंह को पहचाना। उसके बाद डूढ़पुरा के मलखान सिंह, पप्पू यादव, चंदरपुरा के सर्वेश जाटव, सकतपुरा के चरन सिंह को भी पहचान लिया। पुलिस अब उनकी तलाश में जुटी है। उपनिरीक्षक आनंद नारायण त्रिपाठी ने बताया कि अजय सिंह बलरई क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है।

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