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प्रधानी की रंजिश में खूनी खेल, युवक पर गोलियां बरसाईं, साथी की मौत

Etawah Updated Sat, 26 May 2012 12:00 PM IST
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इटावा। बसरेहर थाना क्षेत्र के रिटौली-भदामई मार्ग पर घात लगाकर बैठे हमलावरों ने बाइक सवार एक युवक को गोलियों से भून डाला। जबकि उनका मुख्य निशाना बाइक चला रहा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पास के नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। इस हत्याकांड में प्रधानी की रंजिश का मामला सामने आया है।
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भरथना के गांव नगला ताल निवासी सुभाष यादव पुत्र हृदयराम सिंह का प्रधानी चुनाव के बाद से गांव के ही विश्राम सिंह और राजेंद्र सिंह से रंजिश चल रही है। वह इस मामले में शुक्रवार को मुकदमे की तारीख करने इटावा आया था। तारीख निपटाने के बाद करीब 11:00 बजे वह गांव वापस लौट रहा था। रास्ते में भरथना चौराहे के पास पड़ोस के गांव राउरेहार, भरथना निवासी कप्तान सिंह (40) पुत्र हाकिम सिंह मिल गया। सुभाष ने कप्तान सिंह ने अपनी बाइक पर बैठा लिया।
दोनों चितभवन होते हुए गांव जा रहे थे कि रिटौली-भदामई के बीच पहले से घात लगाए बैठे नगलाताल गांव के सुधीर, दीपा पुत्र राजेंद्र सिंह ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इसी बीच पीछे से बाइक पर सवार होकर पहुंचे राजेंद्र सिंह और उसके तीसरे बेटे अनीश ने भी उन पर गोलियां बरसाईं। गोली लगने से दोनों लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े । दोनों को मृत समझकर हमलावर वहां से भाग निकले। उधर, फायरिंग की आवाज सुनकर पास के गांव के लोग दौड़ पड़े। सड़क पर दो लोगों को खून से लथपथ देख पुलिस को सूचना दी। थोड़ी देर में वहां पहुंची पुलिस ने दोनों को जेके हास्पिटल में भर्ती कराया, जहां कप्तान सिंह की मौत हो गई। सुभाष की हालत गंभीर बनी हुई है। सूचना पर एसएसपी राजेश मोदक, एएसपी ऋषिपाल सिंह और सीओ सैफई सिद्धार्थ भी मौके पर पहुंचे और वारदात की जानकारी ली। एसएसपी ने बताया कि मामला प्रधानी की रंजिश का है। मृतक कप्तान सिंह के भाई की तहरीर पर पुलिस ने सुधीर, दीपा, अनीश और उसके पिता राजेंद्र सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
बाइक पर साथ जाना भारी पड़ा कप्तान को
कप्तान सिंह अपनी बहन के पुत्र के तिलक समारोह में भाग लेने के लिए गुरुवार को मैनपुरी गया था। वह शुक्रवार को वापस लौटा। सवारी के इंतजार में भरथना चौराहे के पास खड़ा था तभी पड़ोस के गांव के सुभाष को देख उसने उसके साथ चलने की इच्छा जताई। सुभाष के साथ जाने की कीमत उसे जान देकर चुकानी पड़ी। तिलक समारोह में कप्तान के भाई राजेंद्र व गुड्डू भी गए थे। वे बाइक से घर पहुंचे ही थे कि उन्हें कप्तान की हत्या होने की खबर मिली। भाइयों के मुताबिक कप्तान की किसी से कोई रंजिश नहीं थी।
वर्षों से चली आ रही थी प्रधानी चुनाव की रंजिश
तुरैया ग्राम पंचायत के नगला ताल निवासी घायल सुभाष यादव के पिता हृदयराम और ग्राम पंचायत के नगला जबरपुरा के विश्राम सिंह के बीच प्रधानी की रंजिश काफी समय से चली आ रही है। इसी रंजिश के चलते वर्ष 2008 में हृदयराम के भतीजे रमेश की हत्या कर दी गई थी। इसमें विश्राम सिंह व राजेंद्र सिंह के परिवारीजनों को आरोपी बनाया गया था। बाद में विश्राम सिंह ने हृदयराम व उसके पुत्रों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया। इसकी शुक्रवार को तारीख थी। तारीख को करने के लिए सुभाष कचहरी आया था। घायल सुभाष के पिता हृदयराम ने बताया कि वर्ष 2000 में उसने विश्राम के भाई सतेंद्र को हराया था। पिछले चुनाव में विश्राम सिंह का पुत्र पंकज और उसके पुत्र सुभाष के बीच मुकाबला था। इसमें पंकज चुनाव जीत गया लेकिन रंजिश खत्म नहीं हुई। तीन दिन पूर्व उक्त लोगों ने उसके पुत्र राजू के साथ भी मारपीट की थी और जानमाल की धमकी दी थी।
तारीख होने के बाद ही बनी हमले की योजना
मुकदमे की तारीख करने सुभाष अकेला आया था। यह देख विपक्षियों ने उस पर हमले की योजना गढ़ डाली। तारीख होते ही विपक्षियों ने सुभाष के अकेले गांव आने की सूचना दी और कुछ दूरी बनाकर स्वयं उसके पीछे लग गए। जिस मार्ग को सुभाष ने चुना उसी रास्ते पर पहले ही दो हमलावर घात लगाकर बैठ गए। संयोग से रास्ते में भरथना चौराहे के पास कप्तान सिंह मिल गया। सुभाष और कप्तान सिंह के बाइक सेपहुंचते ही उस पर फायरिंग शुरू कर दी। इस बीच पीछे से आ रहे दो हमलावरों ने भी फायरिंग की। जो निशाने पर था वह तो गंभीर रूप से घायल हुआ लेकिन पीछे बैठे कप्तान सिंह की जान चली गई।

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