अपहर्ताओं के चंगुल से बच निकला दवा विक्रेता

Etawah Updated Tue, 15 May 2012 12:00 PM IST
जसवंतनगर (इटावा)। रविवार रात को दुकान बंद कर घर लौट रहे मेडिकल स्टोर संचालक का कार सवार बदमाशों ने अपहरण कर लिया। अपहर्ता उसके हाथ पैर और मुंह बांध कर बंद पड़े ईंट-भट्ठे में छोड़कर खाना खाने निकले थे तभी मौका पाकर वह वहां से भाग निकला। सूचना पर एसएसपी राजेश मोदक समेत अन्य अफसरों ने रात में कई स्थानों पर काबिंग की लेकिन अपहर्ताओं का कोई सुराग नहीं लगा। दुकानदार केबेटे की तहरीर पर चार अज्ञात युवकों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया है।
महलई गांव निवासी गिरीश चंद्र शाक्य पुत्र लालाराम शाक्य का कस्बे में रामलीला तिराहे के पास मेडिकल स्टोर है। रविवार की रात 8:30 बजे गिरीश मेडिकल स्टोर बंद करने के बाद साइकिल से गांव की ओर जा रहा था। बकौल गिरीश महलई मोड़ के पास पीछे से आई एक कार उसके बगल में आकर रुकी। वह कुछ समझ पाता कि उसमें बैठे लोगों ने उसे साइकिल से खींचकर कार में डाल लिया।
करीब डेढ़ घंटे तक अपहर्ता उसे इधर-उधर घुमाते रहे। इसके बाद ग्राम फुलरई के पास बंद पड़े ईंट भट्ठे की चिमनी के नीचे उसके हाथ पैर बांधकर और मुंह में टेप लगाकर डाल दिया। बदमाशों ने कार में ही रस्सी व टेप आदि का इंतजाम कर रखा था। इसके बाद खाना खाने की बात कहकर निकल गए। इस बीच किसी तरह उसने अपने बंधन खोले और वहां से भाग खड़ा हुआ।
इधर, जब पिता गिरीश घर नहीं पहुंचे तो पुत्र अंकित ने उनके मोबाइल पर फोन किया। फोन पर किसी और की आवाज सुनकर उसका माथा ठनका। उसने इसकी सूचना पुलिस को दे दी थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने जिले की सीमाएं सील करा दीं। जगह जगह नाकेबंदी कर दी गई। रात करीब डेढ़ बजे गिरीश अपहर्ताओं के चंगुल से छूटकर हाईवे पर पहुंचा तो पुलिस की गाड़ी देख शोर मचा दिया। गिरीश ने पुलिस को सारी दास्तान बताई।
उसने बताया कि कार में ड्राइवर समेत नई उम्र के चार बदमाश थे। उन्होंने कभी उन लोगों को इस क्षेत्र में नहीं देखा था। गिरीश से पूछताछ के बाद अपर पुलिस अधीक्षक ऋषिपाल सिंह यादव, क्षेत्राधिकारी जसवंतनगर केसी गोस्वामी, प्रभारी निरीक्षक राम मूर्ति सिंह यादव ने मलहई गांव के कुछ लोगों को साथ लिया और संदेह वाले स्थानों पर छापामारी की पर कोई सुराग नहीं लगा।
सोमवार की दोपहर 12:00 बजे एसएसपी राजेश मोदक ने भी अधीनस्थ अधिकारियों के साथ गिरीश को लेकर अपहरण स्थल और बरामद स्थल का मुआयना किया। गिरीश के बेटे अंकित ने बताया कि पिता जब घर नहीं पहुंचे तो उसने उनके नंबर पर फोन किया। उधर से कहा गया कि दवा देने के लिए रुक गया हूं। वह आवाज पिता की नहीं लगी। इसके बाद उसने पड़ोसी दुकानदार से पूछताछ की तो पता चला दुकान बंद हो चुकी है। एक बार फिर पिता के नंबर पर फोन किया तो इस बार किसी और ने फोन रिसीव किया और बताया कि पिता की पकड़ हो गई और उसे चंबल की तरह ले जा रहे हैं। इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दे दी। गिरीश के बेटे अंकित की ओर से अज्ञात बदमाशों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया गया है।

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