जीआईसी के छात्रावास में नहीं कोई सुविधाएं

Etawah Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
इटावा। मेंटीनेंस के अभाव में जीआईसी छात्रावास में तमाम समस्याएं पसरी हुई हैं। जिन कमरों में छात्र रहते है, उनमें अधिकांश की छतों का प्लास्टर उखड़ चुका है। दीवारों से झरते चूना को रोकने के लिए अखबार चिपकाने की नौबत बनी हुई है। कमरों के दरवाजे जर्जर हालत में हैं। शौचालय के पाइप चोक हो चुके है। नहाने, धोने और पीने के लिए एक मात्र हैंडपंप का सहारा है। ऐसे में छात्रों के सामने मुश्किल यह रहती है कि वह यहां रह कर पढ़ाई करें या समस्याओं से जूझें।
जीआईसी में पढ़ने वाले छात्राओं के लिए बीएसए दफ्तर के सामने छात्रावास बना हुआ है। इसमें 18 कमरे व दो हाल हैं। ज्यादातर छात्र गर्मी की छुट्टियों में अपने घर जा चुके हैं। लेकिन छात्र किस हालत में यहां रहते है, इसे छात्रावास में व्याप्त समस्याएं आसानी से समझा जा सकता हैं। कमरों की हालत दयनीय है। कोई भी ऐसा दरवाजा नहीं है जो पूरी से बंद हो सके है। बिजली की वायरिंग कहीं नजर नहीं आती। कमरों के अंदर भी छात्रों ने तिकड़म के जरिए रोशनी के प्रबंध किए हुए हैं। कुछ छात्रों को तो इमरजेंसी की भी व्यवस्था करनी पड़ती है। पुरानी हो चुकी दीवारों के चूना को झरने से रोकने के लिए भी छात्रों ने करीब 10 फुट की ऊंचाई तक अखबार लगा रखे हैं।
यहां सात शौचालय तो हैं लेकिन इस्तेमाल में तीन ही आते हैं। चार शौचालय पूरी तरह से चोक हो चुके हैं। इस हिस्से में आते ही उड़ती बदबू शौचालय के होने का अपने आप अहसास करा देती है। समस्या नहाने, धोने और पीने के पानी की भी बनी हुई है। एक मात्र हैंडपंप के जरिए छात्राें को पानी हासिल होता है।
सबमर्सिबल की बोरिंग भी अधूरी
छात्रावास परिसर में पानी की दिक्कत को देखते हुए शिक्षक विधायक जगवीर किशोर जैन की विधायक निधि से सबमर्सिबल पंप लगाया जा रहा है। लेकिन बोरिंग होने के बाद से इसमें अब तक सबमर्सिबल पंप और पाइप नहीं लगाया गया। वार्डेन एससी राजपूत के मुताबिक मिस्त्री के बीमार होने की वजह से इसमें विलंब हुआ है। लेकिन जल्द ही सबमर्सिबल पंप से पानी की सप्लाई मिलने लगेगी।
6 साल से नहीं मिला मेंटीनेंस का खर्चा
इस छात्रावास का दायित्व संभाले वार्डन एससी राजपूत बताते हैं कि पिछले करीब 6 सालों से मेंटीनेंस के लिए कोई धनराशि नहीं मिली है। डीएम स्तर से पत्र भी उच्च विभागीय स्तर पर भेजे जा चुके हैं। जहां तक शौचालय चोक होने की बात है तो पानी की कमी से समस्या बनी हुई है। छात्रों से प्राप्त होने वाले 60 रुपए मासिक शुल्क से जो व्यवस्थाएं संभव होती हैं। वह करा दी जाती हैं। पिछले दिनों पूरे कैंपस की पुताई करा दी गई थी।

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