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स्कूली बच्चों की सेहत जांचने में कंजूसी

Etawah Updated Fri, 07 Nov 2014 05:30 AM IST
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इटावा। जिले के परिषदीय विद्यालयाें में रजिस्टर्ड बच्चाें की सेहत जांचने तथा उन्हें उचित इलाज एवं परामर्श देने के लिए चलाया गया अभियान अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में शिक्षा विभाग की कंजूसी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत 2.55 लाख से अधिक बच्चों में से 616 का ही परीक्षण हो पाया है। जबकि स्कूलों के सैकड़ों बच्चों को अभी इलाज तथा परामर्श की दरकार है। बेहतर उपचार के लिए जिन बच्चों को सैफई तथा आगरा के लिए रेफर किया गया था, धनाभाव के कारण इनमें से अधिकांश बच्चे इलाज के लिए नहीं जा पाए हैं।
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सितंबर-अक्तूबर में जिले के 1240 प्राइमरी तथा 538 मिडिल स्कू लों के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सभी ब्लाकों के अलावा नगरीय क्षेत्र में भी शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में सभी प्रकार के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उचित परामर्श दिया जाना था। जो बच्चे शारीरिक रूप से अपंग हैं उन्हें मौके पर विकलांग प्रमाणपत्र दिए जाने थे। विद्यालयों में दर्ज सभी बच्चों कोे समय पर सूचना न मिल पाने से बड़ी संख्या में बच्चे बीआरसी स्तर पर आयोजित शिविरों में भाग लेने के लिए नहीं जा पाए। शिक्षा विभाग की ओर से भी सभी बच्चों को लाभ पहुंचाने के प्रयास नहीं किए गए। नतीजा यह रहा कि नौ शिविरों का आयोजन करने के बाद भी कवायद औपचारिकता बनकर रह गई। शिविरों में 616 बच्चों का ही परीक्षण हो पाया है। 177 बच्चों को विकलांगता प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।
इसके अलावा 268 बच्चों को जिला अस्पताल, सैफई तथा आगरा के लिए रेफर किया गया है। रेफर किए गए अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों के हैं। पैसा नहीं होने के कारण 70 फीसदी से अधिक बच्चे अभी तक उपचार के लिए जा नहीं पाए हैं। शासन या शिक्षा विभाग भी इन बच्चों की सुध नहीं ले रहा है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक यदि अभियान में रुचि लेते तो नतीजे बेहतर होते। परिषदीय विद्यालयों के तमाम बच्चे रक्त अल्पता, कुपोषण से पैदा होने वाली तमाम बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके अलावा लीवर, नेत्र से संबंधित रोगों की भी शिकायत है।

130 मानसिक रोगी बच्चे इलाज से वंचित
शिविरों में परीक्षण के बाद 130 मानसिक रूप से विकलांग बच्चों में सुधार की संभावनाएं देखते हुए डाक्टरों ने आगरा तथा बरेली अस्पतालों के लिए रेफर किया था। अस्पताल ले जाने तथा इलाज में आने वाले खर्च को अभिभावकों को ही उठाना है। गरीबी के चलते अधिकांश बच्चे उपचार से वंचित बताए जा रहे हैं।

वर्जन--
सितंबर-अक्तूबर में ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों का आयोजन कराया गया था। शिविरों में 616 बच्चाें का परीक्षण कराया गया है। 177 विकलांगता प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। 268 बच्चों को रेफर किया गया है। यह बात सही है कि गरीबी के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को इलाज के लिए लेक र नहीं गए हैं।
अर्चना सिन्हा, जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) इटावा

वर्जन--
ब्लाक स्तर पर शिविरों का आयोजन किया गया था। स्कूल में अध्ययनरत तथा गांव के अन्य बच्चों को शिविर में आने के लिए शिक्षकों के माध्यम से सूचना दी गई थी। जो बच्चे आ गए, उनका परीक्षण किया गया। समस्त बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशीर्वाद बाल गारंटी योजना के तहत परीक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है।
जेपी राजपूत, बीएसए इटावा
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