कब्जामुक्त कराई गई जमीन पर नगर पालिका का ऑफिस बनेगा

Etawah Updated Fri, 09 May 2014 05:30 AM IST
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इटावा। सुंदरपुर मोड़ के पास नगरपालिका की जमीन पर अवैध बूचड़खाने को हटाकर मुक्त कराई गई 10 एकड़ जमीन पर नगरपालिका का ऑफिस बनाने का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। वर्तमान में जहां पर नगर पालिका का ऑफिस है वहां पर एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। भूमि की हद बंदी के लिए गुरुवार को भी अतिक्रमण अभियान जारी रहा है। नगर पालिका की भूमि पर कसाइयों द्वारा कब्जा कर बनाए गए एक दो मंजिला भवन क ो भी जेसीबी से ढहा दिया गया है।
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नगर का विस्तार होने की वजह से मौजूदा समय में नगर पालिका ऑफिस शहर के बीचोबीच आ गया है। चारों तरफ व्यापारिक प्रतिष्ठान होने के कारण यह इलाका भीड़भाड़ वाला हो गया है। नगर के क्षेत्रफल की दृष्टि से भी जगह कम होती जा रही है। ज्यादातर सभासदों की भी यही राय है कि मुक्त कराई गई 10 एकड़ जमीन पर नगर पालिका का ऑफिस बना दिया जाए। इससे जगह भी सदैव के लिए सुरक्षित हो जाएगी और ऑफिस के लिए पर्याप्त स्पेस भी मिल जाएगा। पुराने ऑफिस की जमीन पर एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनवाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह जमीन बाजार में आ जाने के कारण नगर पालिका को मोटी आय भी हो जाएगी और कम से कम एक सैकड़ा से अधिक लोगों क ो रोजगार भी मिल जाएगा। चेयरमैन ने दोनों प्रस्ताव तैयार करने के लिए अधीनस्थों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
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दूसरे दिन भी चला अभियान
उधर, आजाद नगर टीला के पास कसाइयों से भूमि मुक्त करने का अभियान गुरुवार को भी जारी रहा है। चार जेसीबी, चार डंपर, ट्रैैक्टरों के साथ नगरपालिका का पूरा अमला मैदान को साफ करने और मलबा हटाने के काम में लगा रहा है। बुधवार तक जंगली बबूलों के कारण लोग जाने से भी डरते थे। 24 घंटे के भीतर वहां पर सब कुछ बदला-बदला सा नजर आने लगा है। गुरुवार क ो नगरपालिका अमले ने जमीन पर बना लिए गए एक दो मंजिला मकान को भी जमींदोज कर दिया है। परिसर से निकले मलबे को भी डंपर और ट्रैक्टरों से बाहर फिंकवा दिया गया है। हाल फिलहाल जब तक प्रस्ताव मंजूर होकर नहीं होता तब तक यहां पर नगर पालिका के वाहन खडे़ किए जाएंगे। बताते हैं कि चेयरमैन के साहस का ही नतीजा है कि असामाजिक तत्व विरोध के लिए सामने नहीं आए। डेढ़ दशक पहले तो तत्कालीन चेयरमैन जसवंत सिंह वर्मा ने इस जमीन पर कब्जा छुड़ाने की कोशिश की तो कसाइयों ने उन्हें दौड़ा लिया था।
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अभी तक क्यों हुई देरी
मुक्त कराई गई जमीन पर करीब 25 साल से कब्जा है। पहले यहां पर स्लाटर हाउस था, लेकिन बस्ती के बीचों बीच आ जाने के कारण इसे बंद करा दिया गया। हालांकि अवैध रूप से प्रतिबंधित पशुओं क ा वध कर मांस बेचने का धंधा चलता रहा। जितने भी नगर पालिका अध्यक्ष बने सभी इस बात से अवगत रहे कि यहां अवैध कारोबार चल रहा है लेकिन किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई। इधर, लगातार छह महीने से भारी संख्या में कटने के लिए जा रहे प्रतिबंधित पशुओं को मुक्त कराया जा रहा था। आए दिन शहर से मांस से भरे वाहन बरामद किए जा रहे थे। हद तो तब हो गई जब आवारा घूमने वाले प्रतिबंधित पशुओं को भी पकड़कर काटा जाने लगा। बताया जाता है कि चेयरमैन तो इसको पहले ही हटाने का मन बना चुके थे लेकिन लोकसभा चुनाव में व्यस्तता के चलते अवसर नहीं मिल पाया। लोगों ने इस भूमि को मुक्त कराए जाने के काम को ऐतिहासिक बताया है।
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नगर पालिका को होगी करोड़ों की आय
मुक्त कराई गई 10 एकड़ जमीन में यदि मॉल, शापिंग कॉम्प्लेक्स, फ्लैट्स बना दिए जाएं तो नगर पालिका को करोड़ों रुपये का फायदा हो सकता है। इसके अलावा किराये में ही नगर पालिका को प्रति माह इतनी आय हो सकती है कि आर्थिक संकट दूर हो सकता है। यदि इस जमीन को विकसित कर दिया जाए तो शहर की खूबसूरती में और भी निखार आ सकता है।
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मुक्त कराई गई करीब 10 एकड़ जमीन पर नगर पालिका का ऑफिस शिफ्ट किए जाने का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। जब तक प्रस्ताव मंजूर नहीं होता तब तब नगर पालिका इस स्थान को अपने उपयोग में लेगी, ताकि इस तरह के हालात दोबारा से न बनें। - कुलदीप गुप्ता संटू, चेयरमैन, नगर पालिका इटावा

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