लो अब आंखों के डाक्टर भी गए

Etawah Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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इटावा। पीडियाट्रिक्स, कार्डियोलॉजिस्ट, फिजिशियन की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। इकलौते नेत्र सर्जन डॉ. जयदेश कुमार को शासन ने दो माह के लिए विशेष प्रशिक्षण पर मदुरै भेज दिया है। वे लेंस प्रत्यारोपण की नई तकनीक सीखने के लिए गए हैं। तब तक नए आने वाले नेत्र रोगियों के लिए जिला अस्पताल के दरवाजे बंद हो गए हैं। प्रतिदिन नेत्र रोग से संबंधित आधा सैकड़ा से अधिक मरीज निराश होकर वापस लौट रहे हैं।
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वीआईपी जिले का जिलास्तरीय अस्पताल अब कहने क ो ही रह गया है। यहां स्वीकृत होने के बाद भी डेढ़ दर्जन से अधिक विशेषज्ञ डाक्टरों के पद खाली चले आ रहे हैं। पद रिक्त होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. जयदेश कुमार के ट्रेनिंग पर चले जाने के कारण जिला अस्पताल में अब आंखों का इलाज मुमकिन नहीं रह गया। जिला अस्पताल प्रशासन ने नेत्र रोगियों की परेशानी को देखते हुए सीएमओ को पत्र लिखा कि भरथना सीएचसी पर पदस्थ नेत्र चिकित्सक की सेवाएं जिला चिकित्सालय को दिला दी जाएं, लेकिन अभी तक सीएमओ की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। अब एक विकल्प यह बचा है कि फरवरी 14 में रिटायर हो चुके डॉ. आरकेएस भदौरिया की सेवाएं ली जाएं। बताते हैं कि डाक्टर भदौरिया भी संविदा के आधार पर काम करने को तैयार हैं, लेकिन यह व्यवस्था कब तक हो पाती है यह कह पाना कठिन है। अस्पताल प्रशासन की माने तो प्रतिदिन आधा सैकड़ा से अधिक मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है। काउंटर पर नेत्र रोगियों के पर्चे नहीं बनाने के लिए कह दिया गया है। मजबूरी बस नेत्र रोगियों को निजी क्लीनिकों पर दस्तक देनी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल के इकलौते नेत्र सर्जन डॉ. जयदेश कुमार क ो दो महीने के लिए लेंस प्रत्यारोपण की नई तकनीक सीखने के लिए मदुरै भेजा गया है। मरीजों की परेशानी क ो देखते हुए सीएमओ को पत्र लिखा गया है। वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए रिटायर हो चुके एक चिकित्सक की सेवाएं लेने पर विचार किया जा रहा है। -डॉ. वीएस अग्निहोत्री, सीएमएस
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