मेडिकल केयर यूनिट में मरीजों की ही केयर नहीं

Etawah Updated Sun, 27 Oct 2013 05:40 AM IST
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इटावा। पचराहा स्थित पुराने अस्पताल में बसपा शासन में इलाज की सुविधा बहाल की गई थी। इसके लिए करीब सवा पांच करोड़ रुपये की लागत से 50 शैया वाली मेडिकल केयर यूनिट की भी मंजूरी दे दी गई थी। नए अस्पताल के बनने में लगने वाले समय को देखते हुए पुरानी इमारत में ही इलाज की सुविधा शुरू कर दी गई थी, लेकिन आज यहां एक अदद एमबीबीएस डाक्टर तक उपलब्ध नहीं है। यहां अमूमन रोज डेढ़ सौ नए पर्चे बनते हैं और ढाई सौ के आसपास नए-पुराने मरीजों की संख्या रहती है।
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दो सितंबर 2009 को इस मेडिकल केयर यूनिट की शुरुआत हुई थी। बसपा सरकार में तत्कालीन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा ने इसका उद्घाटन किया था। उन्होंने न केवल इस यूनिट को शुरू किया था, बल्कि नई मेडिकल केयर यूनिट की स्थापना का रास्ता भी साफ कर दिया था। इसके निर्माण के लिए करीब सवा पांच करोड़ रुपये भी उपलब्ध करा दिए थे। तब से लगातार इस यूनिट में मरीजों को इलाज मुहैया हो रहा है। पचराहा, छिपैटी, करनपुरा, लालपुरा, गाड़ीपुरा आदि पुराना शहर के तमाम अन्य मोहल्लों के लिए यह मेडिकल केयर यूनिट काफी सहूलियत प्रदान करती रही है। यहां शुरुआत में दो एलोपैथी चिकित्सकों की भी तैनाती रही, लेकिन वर्तमान में यहां सिर्फ एक बीएएमएस चिकित्सक मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
यूनिट के पैथालॉजी सेंटर की हालत भी खराब है। जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। तैनात लैब तकनीशियन के पास माइक्रोस्कोप तक नहीं है, जिससे खून की जांच संभव हो सके। दवाइयों की भी कमी बनी रहती है। शनिवार को कई मरीजों ने तैनात चिकित्सक डा. उमेश चंद्र भटेले से खांसी के सीरप की मांग की तो उन्होंने उपलब्ध न होने की बात कहीं। दवाइयों की कमी के संबंध में चिकित्सक डा. भटेले से जानकारी की तो उनका कहना रहा कि दवाइयां या सीरप पर्याप्त मात्रा में हैं। मरीज की बीमारी की जांच कर सीरप देते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल मेडिकल केयर यूनिट के लिए कोई पद सृजित नहीं हुए हैं, इसलिए अस्थाई व्यवस्था लागू है।
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