दशानन के पुतले की लकड़ी रखने से आती है विद्वता

Etawah Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
जसवंतनगर (इटावा)। जसवंतनगर की रामलीला में लंकापति रावण के वध के बाद पुतले का दहन नहीं होता है, बल्कि उस पर पत्थर बरसा कर और लाठियों से पीटकर धराशायी कर देते हैं। इसके बाद रावण के पुतले की लकड़ियां बीन-बीन कर घरों में ले जाकर रखते हैं। लोगों की मान्यता है कि इस लकड़ी को घर में रखने से विद्वता आती है और धन में बरक्कत होती है।
लोक मान्यता का असर बुधवार की रात यहां देखने को मिला। लीला के दौरान श्रीराम ने अंधाधुंध वाण बरसा कर लंकेश का वध किया। इसके बाद रावण का पुतला जैसे ही धराशायी हुआ, लोग पुतले को लाठी-डंडे से पीट-पीट कर उसमें इस्तेमाल लकड़ी लेने के लिए टूट पड़े। लकड़ी हासिल करने के लिए लोगों को काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी। लकड़ी लेकर जा रहे लोगों ने बताया कि इसे घर में रखने से विद्वता आती है और बक्शे में रखने से धन में बरक्कत होती है। इस लकड़ी का प्रयोग भूत प्रेतों से बचने के लिए भी यहां के लोग करते हैं। इस लोक मान्यता का असर यह है कि रावण वध के बाद पुतले की लकड़ी के नाम पर मैदान में कुछ नहीं बचता है। दूसरी खास बात यह है कि यहां रावण की तेरहवीं भी मनाई जाती है, जिसमें कस्बे के लोगों को आमंत्रित किया जाता है।

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