9 अक्तूबर डाक दिवसः अपना दिन ही भूल गया डाक विभाग

Etawah Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
इटावा। मोबाइल क्रांति ने डाक विभाग में ऐसी उदासीनता फैलाई है कि यह विभाग अपने दिन का जश्न मनाना भी भूल गया। मुफलिसी में फंसा डाक महकमा 9 अक्तूबर को विश्व डाक दिवस के तौर पर मनाता है लेकिन विभागीय अफसर इस बार यह दिवस मनाना ही भूल गया। होना तो यह चाहिए था कि डाक दिवस पर शहर भर के डाकघरों में कार्यक्रम हों लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसी भी अधिकारी व कर्मचारी को डाक दिवस के बारे में जानकारी तक नहीं थी। रोज की तरह डाकखाने खुले और शाम को बंद हो गए।

अस्तित्व बचाने में जुटा डाक विभाग
संचार क्रांति की शुरुआत के बाद से ही डाक विभाग का महत्व कम हो गया है। आज स्थिति यह आ गई है कि डाक विभाग अपने अस्तित्व को बचाने में जुटा हुआ है। यही कारण है कि विभाग मुख्य कार्य से ज्यादा बैंकिंग पर ध्यान दे रहा है। आधुनिक बैकिंग व्यवस्था व एटीएम लगाने की योजना इसका उदाहरण है।

सरकारी कार्यों तक सिमटा
विभाग अब सरकारी कार्यों तक सिमट कर रह गया है। पोस्टकार्ड, अंतरदेशीय व चिट्ठीपत्री करीब-करीब बंद हो गई है। पत्राचार का काम सरकारी कार्यों के कारण ही चल रहा है। सरकारी नौकरियों के आवेदन, कॉललेटर, रजिस्टर्ड डाक, एलआईसी की पॉलिसी आदि का पत्राचार ही कामकाज के नाम पर बचा हुआ है।

मोबाइल क्रांति ने तोड़ी कमर
डाक विभाग की इस स्थिति का कारण मोबाइल क्रांति, कोरियर सेवाएं व इंटरनेट की सुविधाएं हैं। मोबाइल क्रांति ने डाक विभाग की कमर तोड़ दी है।

स्टाफ भी हुआ कम
काम कम होने से पोस्टमैनों की संख्या में भारी कमी आई है। कुछ वर्ष पहले शहरी क्षेत्र में डाक बांटने के कार्य में 22 पोस्टमैन लगे थे। अब शहरी क्षेत्र का काफी विस्तार हो गया है, कई नए मोहल्ले सृजित हुए हैं लेकिन पोस्टमैनों की संख्या में गिरावट आई है। वर्तमान में शहर क्षेत्र में डाक बांटने की जिम्मेदारी 15 पोस्टमैनों की है।
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डाक दिवस की जानकारी नहीं है। मैं आज छुट्टी पर हूं, मुझे नहीं पता की विभाग में क्या कार्यक्रम हुए।-लाल सिंह, डाक अधीक्षक

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