नगद खाद महंगी, उधार लो सस्ती

Etawah Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
इटावा/ बकेवर। जनपद के सरकारी संस्थानों पर खाद की बिक्री दो दामों में की जा रही है। सहकारी समितियों से जुड़े किसानों को तीन सौ रुपए सस्ती डीएपी उधारी में मिल रही है। जबकि आम किसानों को नगद देने के बावजूद खाद के दाम ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। एक ही माल के दो रेट होने से किसानों में रोष है। आम किसान कहते हैं कि सरकार की नजर में समितियों से जुड़े लोग ही किसान हैं। जो लोग समितियों से नहीं जुड़े हैं वे किसान नहीं हैं।
जनपद में खरीफ की बुवाई शुरू हो गई हैं। बकेवर, इकदिल क्षेत्र में काफी संख्या में किसान आलू की खेती करते हैं। जबकि अन्य क्षेत्रों में धान बाजरा की बुवाई होती है। आलू की खेती के लिए एक एकड़ जमीन में 4-5 बोरी डीएपी की जरूरत पड़ती है। जबकि गेहूं व धान की फसल के लिए प्रति एकड़ एक बोरी डीएपी पर्याप्त है। ऐसे में खाद की मांग बढ़ गई है। अब सरकारी संस्थानों में डीएपी खाद के दो रेटों से किसान परेशान है। जो किसान समितियों से नहीं जुड़े हैं उन्हें सहकारी संघ से डीएपी 1209 रुपए प्रति बोरी के दर से बेची जा रही है। जबकि समितियों पर डीएपी 910 रुपए प्रति बोरी है। यहां उधार की भी सुविधा है। खाद एक और दाम अलग अलग होने पर किसानों का कहना है कि समितियों से जुड़े किसानों को अतिरिक्त लाभ दिया जा रहा है।
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डीएपी वितरण में बह रही है उल्टी गंगा
व्यापारिक क्षेत्र का यह नियम है कि जो चीज नगद खरीदी जाती है वह कुछ सस्ती मिल जाती है और जो चीज उधार ली जाती है वह नगद की दरों से कुछ महंगी हो जाती है। परंतु सरकारी संस्थाओं में डीएपी की बिक्री में उल्टी गंगा बहाई जा रही है। सहकारी समितियों से उनके सदस्यों को उधार में खाद मिलती है। जो उनको तीन सौ रुपए सस्ती दी जा रही है जबकि सहकारी संघों पर नगद खाद दी जाती है। वहां पर महंगी दरों पर खाद दी जा रही है।
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समितियों पर डीएपी ऋण के रूप में सदस्यों को उपलब्ध कराई जाती है जबकि सहकारी संघों पर नगद बिक्री होती है। जनपद में पुरानी दर का स्टॉक उपलब्ध था। शासन के आदेश थे कि पुराने स्टॉक की डीएपी को ऋण के रूप में वितरित की जाए। अब पुराने दर की खाद बफर में खत्म हो चुकी है सिर्फ थोड़ी बहुत समितियों पर है। इसके खत्म होने पर नए दर की ही खाद समितियों से किसानों को उपलब्घ होगी। -हीरालाल यादव सहायक निदेशक सहकारी समितियां इटावा
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किसानों में भेदभाव उचित नहीं
डीएपी खाद वितरण में किसानों में भेदभाव उचित नहीं है। दोनों ही स्थानों पर खाद तो किसान ही खरीदेगा। इस खाद को डालकर पैदा होने वाली फसल को मूल्य तो किसानों को अलग-अलग नहीं मिलेगा, तब यह भेदभाव क्यों। थोड़ा अंतर होता तो ठीक था लेकिन अंतर 300 रुपए प्रति बोरी का है। इससे उन किसानों की फसल की लागत काफी बढ़ जाएगी जो समिति के सदस्य नहीं है। -सुधीर कुमार ऋषीश्वर किसान ग्राम हर्राजपुर
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छोटे किसान हो रहे हैं आहत
समितियों से अधिकांश बड़े किसान जुड़े होते है। सरकार भी उन्हीें बड़े किसानों को लाभ दे रही है। छोटे किसानों पर ध्यान नहीं है, जो एक-दो बोरी नगद खरीद कर डालते हैं। उनको नगद खरीद पर मंहगी खाद दी जा रही है। यह उचित नहीं है सबके साथ बराबर व्यवहार होना चाहिए। यदि खाद पुराने दर की है तो दोनों ही स्थानों पर उसकी उपलब्धता कराई जानी चाहिए।-गजेंद्र यादव किसान ग्राम चटोरपुरा
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