29 साल बाद धुला गबन का आरोप

Etah Updated Fri, 21 Dec 2012 05:30 AM IST
एटा। गबन के आरोप में फंसे लिपिक को 29 साल बाद न्याय मिला। अपर सिविल जज की सुनवाई में लिपिक पर लगाए गए आरोप निराधार पाए गए। वर्ष 1983 में अपने ऊपर लगे आरोप से लिपिक सदमे में आ गया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। लिपिक के परिजनों ने बताया कि कोर्ट से न्याय मिलने के बाद उन्होंने खोया सम्मान पा लिया है।
चन्द्रपाल सिंह वर्मा निवासी चोंचा वनगांव थाना कोतवाली नगर वर्ष 1983 में जिला कोषागार में लिपिक के पद पर तैनात था। उसी दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी ने उनके खिलाफ 8640 रुपए का गबन करने का आरोप लगाया था। जिसे लेकर मामले के साक्ष्य एवं गवाह कोर्ट में पेश कर दिए गए थे। कुछ समय बाद लिपिक ने केस दर्ज होने के सदमे से दम तोड़ दिया था। जिसके बाद में उसकी पत्नी गिरजादेवी ने न्याय पाने के लिए केस लड़ा था। प्रतिवादी की तरफ से भूपसिंह शाक्य एडवोकेट पैरवी कर रहे थे। गुरुवार को मामले की सुनवाई अपर सिविल जज रजत वर्मा के समक्ष की गई। इस दौरान लिपिक पर लगाए गए गबन के आरोप निराधार पाए गए।

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