मुख्यमंत्री जी, सुन लो पुकार तुलसीबाबा हमारे हैं

Etah Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
सोरों। सूकरक्षेत्र व तुलसी जन्मभूमि को लेकर पैदा हुआ विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। अनाज मंडी से गंगाभक्त समिति के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने काली पट्टी बांधकर कस्बे में मोटरसाइकिल रैली निकाली। युवा सूकरक्षेत्र का गौरव तुलसी हमारा है, हम तुलसी के तुलसी हमारे आदि नारे लगाते हुए रैली निकाल रहे थे। रैली चंदन चौक, बसस्टैंड रोड, मेला मार्गशीर्ष रोड, हर की पैड़ी, बदरिया होती हुई चक्रतीर्थ पहुंची। जहां से बारू बाजार, बड़ा बाजार, लहरा रोड, रामसिंहपुरा, कटराबाजार होती हुई रेलवे रोड पर समाप्त हुई। रैली में सतीशचंद्र भारद्वाज, शिवांशु दुबे, दिवाकर सोनी, आदित्य काकोरिया, मनमोहन पाठक, अमित अग्रवाल, संजय मौनी, अतुल महेरे, गौरव पाठक, चिंटू भारद्वाज, विष्णु बौहरे, मनोज तिवारी, सौरव दीक्षित, नितिन राठौर, शरद पांडे आदि बड़ी संख्या में युवा मौजूद थे।


उपवास पर बैठे युवा तीर्थपुरोहित
सोरों। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गौंडा को तुलसी जन्मभूमि व सूकरखेत बताकर विकास के लिए 20 लाख रुपये का अनुदान जारी करने के विरोध में मंगलवार को युवा तीर्थपुरोहितों ने मंदिर द्वारिकाधीश के बाहर बैठकर एक दिन का उपवास कर प्रदर्शन किया। तुलसी श्रम समिति के नेतृत्व में हुए धरने में लोगों ने विधायक मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ नारेबाजी की। युवा तुलसी साहित्य मर्मज्ञ अमित अनाड़ी व श्रीकांत तिवारी ने सनातन ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष स्वामी भगवदाचार्य को तुलसी जन्मभूमि की वास्तविकता को लेकर खुला शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी है। समिति ने मुख्यमंत्री से की गई पांच सूत्री मांगों में विधानसभा में गलत स्थान को सूकरक्षेत्र व तुलसी जन्मभूमि बताने वाले बयान का खंडन करने, तुलसी जन्मभूमि के विकास के लिए स्वीकृत धनराशि निरस्त करके सोरों के लिए आवंटित क रने, शासन स्तर पर सोरों को तुलसी जन्मभूमि घोषित करने, सरकारी पाठ्य पुस्तकों में तुलसी जन्म स्थान सोरों शूकरक्षेत्र जनपद कासगंज स्पष्ट रूप से अंकित करने तथा वर्तमान जिला कासगंज का नाम महाकवि तुलसीदास के नाम पर रखने की मांग की गई। धरने में शिव वैंदेल, नीरज उपाध्याय, गणेश बरबारिया, भारत निर्भय, श्रीकृष्ण, आशुतोष निर्भय, मनोज भारद्वाज, बृजेश उपाध्याय, दिवाकर सोनी, रामगोविंद महेरे, श्याम बिहारी आदि शामिल हुए।
फोटो 08 सोरों में मंदिर द्वारिकाधीश पर धरने पर बैठे युवा तीर्थपुरोहित
बैठक में जताया रोष
गंजडुंडवारा। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा की बैठक में सोरों के स्थान पर राजापुर को तुलसीदास की जन्मस्थली घोषित करने पर रोष व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि तुलसीदास की असली जन्मभूमि सोरों है। इसके विकास के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जनपद में व्यापक स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। बैठक में आकाश गर्ग, प्रभात गुप्त, राजीव गुप्त, अंकित गुप्त, रवि वर्मा, अंकुर पालीवाल, रोहित गुप्त, जतिन अग्रवाल आदि मौजूद थे।

परिवहन राज्य मंत्री के वक्तव्य पर हर्ष
सोरों। महाकवि तुलसीदास की जन्मस्थली के संबंध में छिड़े विवाद के विषय में परिवहन राज्यमंत्री मानपाल सिंह के मथुरा में दिए गए वक्तव्य कि ‘यह कोई विवाद का विषय ही नहीं है, तुलसीदास जी की जन्मस्थली सोरों ही है और वही रहेगी। मुख्यमंत्री को किसी ने गलत जानकारी दे दी होगी।’ पर नगर की जनता ने हर्ष व्यक्त किया है। वरिष्ठ पत्रकार तुलसी मानस के संपादक डॉ. प्रभाकर पाराशरी ने कहा कि महाकवि संत तुलसीदास जी की जन्मभूमि सोरों के तथ्यों से मानपाल सिंह कई दशकों से अवगत हैं। केए कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित ने कहा कि हिंदी जगत के अनेकों विद्वान डॉ. रामदत्त भारद्वाज, आचार्य वेदव्रत शास्त्री, डॉ. नरेशचंद्र बंसल, डॉ. रामकृष्ण शर्मा, डॉ. शंभूनाथ सिंह वाराणसी आदि विद्वानों ने सोरों को ही तुलसीदास की जन्मस्थली सिद्ध किया है। ज्योतिषाचार्य सुधांशु निर्भय, जिला शासकीय अधिवक्ता उपेंद्र मिश्र एडवोकेट, नगर पालिका अध्यक्ष अर्चना यादव, पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि सुधीर यादव, सपा नेता ओमशिव मिश्र, मानसिंह कु शवाह, कृष्ण मुरारी वशिष्ठ, रवि पाराशर, भूपेश शर्मा नगर अध्यक्ष, सुरेश पटियात अध्यक्ष अखिल भारतीय तुलसी जन्म महोत्सव समिति, इंद्र दत्त शर्मा, पोदनलाल तिवारी, सुरेशचंद्र त्रिवेदी, राधामोहन समाधिया, संत तुलसीदासनगर विकास समिति आदि ने मानपाल सिंह के वक्तव्य पर हर्ष व्यक्त किया है।

विवाद को रखेंगे सीएम के समक्ष
सोरों। सपा नगर अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने परिवहन राज्य मंत्री को तुलसी जन्मभूमि संबंधी समस्त जानकारी से अवगत कराया है। राज्यमंत्री मानपाल सिंह एवं जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेन्द्र यादव ने आश्वासन दिया है कि सोरों के विद्वानों का एक प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमंत्री से मिलकर तुलसी जन्मभूमि संबंधी समस्त अभिलेखों को उनके समक्ष प्रस्तुत करेगा।

क्या कहते थे पुराने साहित्यकार
- नामचीन साहित्यकार बाबू गुलाबराय का कहना था कि विद्वानों का मत रहा है कि तुलसीदास का जन्म तो सोरों में हुआ है किन्तु वे बाद में राजापुर जा बसे। बांदा का गजेटियर भी इसी बात को प्रमाणित करता है। जिसमें उल्लेखित है कि राजापुर का गांव सोरों के संत तुलसीदास ने बसाया।
- सुप्रसिद्ध साहित्यकार रामज्ञेय राघव ने भी तुलसीदास की जन्मभूमि को शूकर क्षेत्र सोरों माना है। उन्होंने अपने उपन्यास ‘रत्ना की बात’ के कथानक में तुलसीदास की जन्मभूमि सोरों शूकर क्षेत्र को ही बताया है।
- दिवाकर वर्मा के नाटक ‘रत्नावली’ में भी तुलसीदास का जन्मस्थान शूकर क्षेत्र सोरों ही वर्णित है।
- डॉ. कृष्ण माधव मिश्र ने भी कई साक्ष्यों और महाकवि के जन्म स्थान के भवनों के शिलालेखों व आलेखों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया। उनके एवं शोध के निष्कर्ष में तुलसी का जन्मस्थान सोरों ही है।

जीनत भी करेंगी मुख्यमंत्री से बात
कासगंज। पटियाली विधान सभा क्षेत्र की विधायक जीनत खान ने कहा कि वे सोरों के पक्ष को लेकर मुख्यमंत्री बात करेंगी। संत तुलसीदास की जन्मस्थली सोरों शूकर क्षेत्र है। यह बेहद पवित्र स्थान है।

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