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सर, विधायक जी से बना प्रमाणपत्र क्यों नहीं मान्य!

Etah Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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एटा। शिक्षा विभाग में जारी शासन की दोहरी नीति और मानक व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रहे हैं। इसे लेकर छात्र-छात्राएं मायूस हैं। वहीं, अभिभावकों में असंतोष है। उनका कहना है कि जाति धर्म और संप्रदाय के नाम पर जारी हो रहे अलग-अलग फरमान बच्चों का मनोबल गिरा रहे हैं।
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शासन की नई व्यवस्था में आय प्रमाणपत्रों जारी करने का अधिकार चेयरमैन, जिला पंचायत सदस्य, अध्यक्ष, एमएलए, एमएलसी आदि जनप्रतिनिधियों को दिया गया। बाद में बताया गया कि यह सुविधा केवल अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए ही लागू है। जबकि शेष को आय प्रमाण विधिवत तहसील से प्राप्त करना होगा। इतना ही नहीं शासन ने अल्पसंख्यक समुदाय की गरीबी सीमा को भी बढ़ाकर दो लाख वार्षिक कर दिया है। जबकि अन्य की सीमा पूर्ववत है। इसे लेकर छात्रों, अभिभावकों में भी रोष है।

छात्र धर्मेंद्र सिंह, विपिन कुमार कहते हैं कि आय प्रमाणपत्रों के नाम पर दोहरी नीति गलत है। जनप्रतिनिधियों से बने उनके भी आय प्रमाणपत्र मान्य होने चाहिए। इसके लिए सैकड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। हजारों बच्चे तो इसके चलते आवेदन ही नहीं कर पा रहे। अभिभावक श्याम किशोर, बिजेंद्र सिंह कहते हैं कि एक ही एक ही प्रदेश, जनपद यहां तक स्कूल में लाभ के दोहरे मानकों से प्रतिभाओं का दमन हो रहा है। प्रधानाचार्य स्वीकारते हैं कि जनप्रतिनिधियों की छूट के चलते अधिकांश बच्चों ने इनसे प्रमाणपत्र बनवा लिए थे लेकिन बाद में बदले फरमान से वे मायूस हैं। कुछ तो आवेदन भी नहीं कर रहे।विभागीय निर्देशों के अनुसार जनप्रतिनिधियों के आय प्रमाणपत्र केवल हाईस्कूल कक्षाआें तक के अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए ही अनुमन्य हैं। शेष को पूर्ववत तहसील से ही प्राप्त करने होंगे। इस वर्ग के आवेदकों की आय सीमा बढ़ाकर दो लाख कर दी गई है।
जितेंद्र कुमार मलिक, जिला विद्यालय निरीक्षक, एटा

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