12 साल की उम्र में हाईस्कूल पास!

Etah Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
एटा। शिक्षा के प्रति जागरूकता कहें या फर्जीबाड़ा। शिक्षा के साथ ही जनपद में उम्र घटाने का चलन बढ़ता जा रहा है। स्कूलों में दर्ज जन्म तिथियों को सही मानें तो जिले के बच्चों का बचपन घरों में नहीं स्कूलों से शुरू हो रहा है। गोद में खेलने के दिनों में वे स्कूलों में पहाड़े सुना रहे हैं। छह वर्ष से शुरू होने वाली प्राथमिक शिक्षा को इस उम्र से शुरू कर रहे हैं। जनपद के सैकड़ों बच्चे तो दस से ग्यारह वर्ष की उम्र में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की तैयारी में हैं। तो वहीं सैकड़ों तो कक्षाएं पास भी कर चुके हैं। इन दिनों भरे जा रहे बोर्ड परीक्षा आवेदन फार्म एवं पंजीकरण आवेदनों में इनका खुलासा हो रहा है।
कक्षा ग्यारह के पंजीकरण आवेदकों में सैकड़ों बच्चे 13 वर्ष के हैं। छात्र सुमंत कुमार, रजनेश, अजय पाल, उजैर खान आदि की जन्मतिथि जुलाई 1999 के बाद की है। ऐसे मे तेरह वर्ष से पूर्व ही यह कक्षा ग्यारह के छात्र बन गए। तो वहीं कक्षा दस एवं नौ में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं में सैकड़ों की जन्मतिथि 2000 के बाद की दर्ज है। शहर स्थित के एक विद्यालय में उस समय अजीब स्थिति आ गई जब 26 जुलाई 2002 की जन्मतिथि वाले छात्र प्रदीप यादव ने कक्षा नौ में पंजीकरण कराया। स्कूलों की डाटा शीट के अनुसार बीस से तीस प्रतिशत बच्चे 12 से 13 वर्ष की उम्र में ही कक्षा दस में पहुंच गए हैं। तो वहीं 13 से 15 साल की उम्र पूरी करने से पूर्व ही इंटर की परीक्षा देने वालों की संख्या भी हजारों में है। उम्र घटाने में लड़कियां भी पीछे नहीं हैं। वे भी 12 वर्ष में हाईस्कूल और 14-15 वर्ष की उम्र में इंटर पास करने का कीर्तिमान बना रही हैं।उम्र घटाने का साधन बने स्कूल, नकल के लिए कुख्यात जनपदीय शिक्षण संस्थाएं अब उम्र घटाने का भी जरिया बन गई हैं। विभागीय मिलीभगत से अभिलेखों में वे अधेड़ से युवा, युवा से किशोर बन रहे हैं। इतना ही नहीं मनचाही उम्र पाने के लिए अन्य जनपदों के लोग यहां हाईस्कूल- इंटर परीक्षाओं में शामिल होकर प्रमाणपत्र हासिल कर रहे हैं।यद्यपि शिक्षा की कोई उम्र नहीं है फिर भी स्कूली शिक्षा तीन वर्ष से पूर्व संभव नहीं हो सकती। वैसे भी पढ़ाई का बोझ बच्चे पर चार साल के बाद ही आना चाहिए। दो वर्ष की उम्र में स्कूली पढ़ाई संभव नहीं लगती।डा. यूपी शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल>उम्र को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद की कोई भी निर्धारण बाध्यता नहीं है। उम्र की जानकारी यूपी बोर्ड को भेजी जाती है। इसकी पुष्टि के लिए प्रथम शिक्षण संस्था के अभिलेखों की जांच की जा सकती है। सुनील कुमार, सह जिला विद्यालय निरीक्षक

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