अब इलाज को नहीं होगी देर

Etah Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
एटा। शासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाए हैं। जिसके चलते प्रदेश सरकार ने जिला अस्पताल में मरीजों के भर्ती होने के लिए लगने वाला शुल्क माफ करने के साथ ही ब्लाक स्तर पर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए मुफ्त में एंबुलेंस संचालन सेवा उपलब्ध कराने के लिए जिले को दो एंबुलेंस दी हैं। शासनादेश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्राप्त हो चुका है।
जिला अस्पताल में बीमारियों से पीड़ित होकर पहुंचने वाले मरीज, जिनको चिकित्सकों द्वारा अस्पताल में भर्ती किया जाता था। जिसके चलते मरीज और उनके तीमारदारों को भर्ती शुल्क के रूप में 35 रुपये की फीस जमा करनी पड़ती थी। लेकिन अब शासन ने इसे पूरी तरह से मुफ्त में करने के लिए विभाग को आदेशित किया है। सीएमओ डा. आरसी पांडेय ने बताया कि मरीज के किसी प्रकार से भर्ती होने के पर कोई फीस नहीं ली जाएगी। चाहे वह इमरजेंसी से भर्ती हो या फिर ओपीडी से। यह आदेश जिला अस्पताल में भेज दिया गया है।
इसके साथ ही प्रदेश सरकार गरीब तबके के लोगों पर मेहरबान होती हुई नजर आई है। जिसने ब्लाक स्तर पर एंबुलेस सुविधा नि:शुल्क में उपलब्ध कराई है। जिसके चलते बीपीएल कार्डधारक गर्भवती महिलाओं या फिर अन्य किसी बीमारी से पीड़ित मरीजों को सूचना पर ये एंबुलेंस फ्री में स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाएगी। इतना ही नहीं स्वास्थ्य केंद्र से रेफर होने वाले मरीजों को रेफर सेंटरों तक भी पहुंचाएगी।
सीएमओ ने बताया कि प्राप्त आदेश में निर्देशित किया गया कि बीपीएल कार्ड धारकों के लिए यह नि:शुल्क सेवा रहेगी। शेष अन्य वर्ग के लोगाें के लिए एंबुलेंस का किराया पांच रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से वसूला जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में दो एंबुलेंस शासन स्तर से उपलब्ध कराई गई है। जिन्हें अलग-अलग ब्लाक के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात किया जाएगा। शुक्रवार को यह जिले को मिल जाएंगी। वहीं आज ओपीडी में मरीज पर्चा बनवाते व दिखाते नजर आए।
वहीं जहां शासन स्तर पर एक तरफ गांव-गांव तक मरीजों की सहायता के लिए एंबुलेंस सुविधा मुहैया कराई जा रही है। तो वहीं जिला अस्पताल में उपलब्ध दोनों एंबुलेंस आज भी शोपीस बनकर धूल फांक रही हैं। मरीजों को इनका कोई लाभ नहीं मिल रहा, बल्कि कमीशन के जोर पर अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंसों का प्रयोग हो रहा है।
इधर शासन द्वारा मरीजों को नि:शुल्क भर्ती करने का फरमान जिला अस्पताल में तैनात फार्मासिस्टों के लिए राहत का पैगाम है। क्योंकि पहले मरीजों के भर्ती होने पर 35 रुपये का शुल्क जमा कराया जाता था। जिस पर फार्मासिस्ट उसकी एंट्री रसीद काटने के साथ ही अन्य रजिस्टरों पर धनराशि अंकित करते थे। लेकिन अब उन्हें ऐसा नहीं करना पडे़गा।

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