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बैंक हड़ताल से चरमराईं जनपद की वित्तीय व्यवस्थाएं

Etah Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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एटा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंकिंग यूनियंस के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय बैंक हड़ताल से जनपद की वित्तीय व्यवस्थाएं चरमरा गईं। लोग पैसे के लेनदेन के लिए परेशान रहे। तो वहीं कारोबारी चेक बनवाने और इनके भुगतान के लिए बैंकों के चक्कर लगाते दिखे। व्यवसायियों के अनुसार इस हड़ताल से करोड़ों का लेनदेन प्रभावित होगा।
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रविवार, सोमवार के अवकाश के बाद बुधवार से शुरू हुई दो दिवसीय बैंक हड़ताल ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अभाव में दर्जनों लोग बुधवार सुबह निर्धारित समय पर बैंक पहुंचे लेकिन यहां तालाबंदी को देखकर उनके होश उड़ गए। यहां उपस्थित कर्मचारी नारेबाजी करते दिखे तो पूरा मामला ही समझ में आ गया। शहर के कई एटीएम के शटर डाउन दिखे। शनिवार को जमा हुए चेक का भुगतान लेने आए प्रदीप सिंह, भोला शंकर आदि बताते हैं कि शनिवार के बाद दो दिनों की छुट्टी रही। ऐसे में उन्हें आज पेमेंट होने की उम्मीद थी। लेकिन सब कुछ बेकार हो गया। कांट्रेेक्टर राजेश यादव बताते हैं कि बड़ा पेमेंट होने के चलते भुगतान न होने से उनकी परेशानियां बढ़ रही हैं। वे बताते हैं कि शनिवार हाफ डे के बाद से ही बैंक व्यवस्थाएं प्रभावित हैं। दो दिन की छुटटी के बाद मंगलवार को स्टाफ का टोटा रहा।
मौके पर डीडी बनवाने, एजूकेशन लोन और अन्य कार्यों के लिए भी लोग बैंकों के चक्कर काटते दिखाई दिए। भारतीय स्टेट बैंक पहुंचे पीके सिंह बताते हैं कि बेटे की बीटेक फीस का डीडी बनवाना था, लेकिन दो दिनों की हड़ताल ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। संबंधित कालेज ने राष्ट्रीयकृत बैंक का ही डीडी मांगा है।
विभिन्न मांगों को लेकर यूनाईटेड फॉरम ऑफ बैंकिंग यूनियंस के आह्वन पर शहर के दर्जन भर से अधिक बैंकों के शटर डाउन रहे। बैंक परिसर में उपस्थित आंदोलनकारी अधिकारी-कर्मचारियों ने आईबीए और उच्च बैंक प्रबंधन के विरुद्ध नारेबाजी की। स्टेट बैंक स्टाफ ऐसोसिएशन के आंचलिक सचिव धर्मेंद्र सिंह चंदवरिया ने कहा कि वर्षों से लंबित मांगे अब तय करनी ही होंगी। बैंक ऑफ इंडिया के मुकेश भार्गव ने कहा कि ग्रामीण शाखाआें को बंद न किया जाए। स्टेट बैंक अधिकारी ऐसोसिएशन के सचिव केके जैन खंडेलवाल समिति की सिफारिशों का विरोध किया। वरुन सिन्हा, जीके लडडा ने भी संबोधित किया। उपस्थित लोगों में अनिल राठौर, अरुण रत्न, सीके पचौरी, आरके रतन, बीपी सिंह, प्रमोद पचौरी आदि थे।
नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक बैकर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष डीपी सिंह चौहान ने कहा कि बैंक संगठन मजबूरी में ही आंदोलन करते हैं। इस दौरान जहां उपभोक्ताओं को असुविधा होती है। वहीं, बैंक स्टाफ को हजारों रुपये वेतन भी गंवाना पड़ता है। साथ ही इन दिनों के लंबित कार्य को वर्किंग डेज में अतिरिक्त समय देकर निपटाना पड़ता है। ऐसे में उन पर दोहरी मार रहती है। बावजूद इसके उच्च प्रबंधन और सरकारें वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर गंभीर नहीं है।

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