परिषदीय स्कूलों में भी मम्मियां पूछेंगीं बच्चों की प्रगति

Etah Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
एटा। प्राथमिक शिक्षा में पैरेंट्स मीटिंग के शासकीय फरमान को शिक्षाविद, समाजसेवी और मनोवैज्ञानिक अच्छा कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि आदेश का अनुपालन हुआ तो इसके सुखद परिणाम आएंगे।
करोड़ों के खर्च के बाद भी बदहाल चल रही प्राथमिक शिक्षा में हो रहे कुछ बदलावों को लेकर लोगों में प्रतिक्रियाएं हैं। पीटीए, एमटीए के गठन और हर माह बैठकों के आदेश का जनपदीय लोगों ने स्वागत किया है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ओम प्रकाश मिश्र निर्णय का स्वागत करते हैं। इनका कहना है कि छोटे बच्चों की समस्याओं केे लिए पीटीए बैठकों को जरूरी बताते हैं। इनका कहना है कि इन बैठकों केे माध्यम से जहां शिक्षक-शिक्षिकाएं बच्चों से संबंधित शिकायतें उनके माता पिता को बता सकेंगीं। वहीं, अभिभावक भी बच्चों की मूलभूत समस्याओं से शिक्षकों को अवगत कराएंगे।
सामाजिक संस्था वामा की अध्यक्ष डा. निरूपमा वर्मा इसे देर से लिया गया सही निर्णय बताती हैं। इनका कहना है कि अभिव्यक्ति में अक्षम बच्चे छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर अलग थलग रहते हैं। जिससे उनका विकास रुकता है।
मनोवैज्ञानिक आरजू सिंह का कहना है कि अभिभावक और शिक्षकों का मेल मिलाप बच्चों को प्रभावित करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से उनका आत्मविश्वास और टीचर्स से लगाव बढ़ता है। वहीं, टीचर्स भी बच्चों की पृष्ठभूमि से भिज्ञ होंगे। जो बाल समस्याएं जानने और उनके निदान में सहायक होगा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एसएस यादव स्वीकारते हैं कि इन बैठकों के अच्छे परिणाम आएंगे। शिक्षकों को लक्ष्य प्राप्ति में आसानी होगी। वे बताते हैं कि संस्थाओं में पीटीए और मदर-टीचर्स समितियों का गठन किया गया है। बैठकें भी शुरू हो गई हैं।

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