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ारागार में कैश है तो ऐश

Gorakhpur Bureau Updated Sun, 04 Jun 2017 10:39 PM IST
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देवरिया जिला जेल में ‘कैश है तो ऐश है’
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देवरिया। ‘कैश है तो ऐश है’ का जुमला देवरिया और कुशीनगर के बंदियों का बोझ ढो रहे देवरिया जिला कारागार पर बिल्कुल फिट बैठता है। जेल में रह कर भी अगर काम नहीं करना, तो आपकी मर्जी, बस उसके लिए मुट्ठी गर्म करने के लिए आपके पासा पैसे होने चाहिए। कैश के दम पर यहां मनचाही बैरक से लेकर जेल में वीआईपी व्यवस्था तक मुहैया हो सकती है।
यूं तो जेल में सालों से बंद सजायाफ्ता कैदियों से काम कराए जाने का नियम है, लेकिन सजायाफ्ता कैश के बल पर यहां ऐश करते हैं। दोष सिद्ध कैदी अधिक समय से एक जेल में रहते-रहते वह व्यवस्था से पूरी तरह वाकिफ हो जाते हैं। मनबढ़ स्वभाव और पैसे के दम पर वह जेल में जैसा चाहते हैं वैसी व्यवस्था इन्हें मुहैया हो जाती है, जबकि कमजोर और बुजुर्ग कैदियों से काम कराया जाता है। कैश का जलवा कुछ ऐसा है कि यहां दोष सिद्घ कैदी कैदी मामूली धाराओं में निरुद्घ बंदियों से अपना काम भी कराते हैं। यही हाल बैरक छंटाई का है। मनचाहे बैरक में रहने के लिए भी बंदी रक्षक वसूली करते हैं। हाल में जेल से जमानत में रिहा हुए एक कैदी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जेल में कमजोर, बुजुर्ग कैदियों की हालत सबसे दयनीय है। हालांकि जेलर अनंद कुमार का कहना है कि जेल में सजायाफ्ता कैदियों से सुरक्षा व्यवस्था से लेकर ऑफिस का काम कराया जाता है। कुछ बंदी ऐसे हैं जो खेत और बागीचे में काम करते हैं। काम करने वाले बंदी व कैदियों को प्रतिदिन के हिसाब से मेहनताना मिलता है।

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