बेटी बचाने को आगे आईं प्रमिला

Deoria Updated Sun, 26 Jan 2014 05:45 AM IST
सलेमपुर। एक तरफ बेटियों को बचाने के लिए समाज में जागरूकता पैदा की जा रही है, तो दूसरी ओर समाज के कुछ नकारात्मक सोच वाले पता नहीं किस मजबूरी में बेटियों को अपनाने से इंकार कर रहे हैं। शनिवार को देवपार गांव में नवजात बच्ची को एक महिला मजदूर अपनी ममता की छांव दी।
कोतवाली क्षेत्र के देवपार गांव के बाहर मूंज की झुरमुट में एक नवजात को गांववालों ने देखा। इसकी खबर मिलते ही लोगों की भीड़ जुट गयी। सूचना पाकर दो घंटे बाद पहुंची पुलिस ने नवजात को अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद नवजात का स्टॉफ नर्सों ने नाल काटा। जानकारी पाकर अस्पताल पहुंची प्रर्मिला पत्नी रमाकांत ने बच्ची को अपना ली। नवजात को अपनाने वाली प्रर्मिला बिहार के गुठनी थानाक्षेत्र के सेलउर गांव की रहने वाली है।
वह तकरीबन दस वर्षों से देवपार गांव के एक ईंट-भट्ठे पर रहकर्र इंट बनाने का कार्य करती है। प्रर्मिला ने बताया कि बेटी को पाने के बाद काफी खुशी हो रही है। आज के समय में बेटों से ज्यादा बेटियां ही वफादार हैं। इस बाबत इंस्पेक्टर बीबी सिंह ने बताया कि नवजात बच्ची को प्रर्मिला पालन-पोषण करेगी।

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