‘आजादी की खुशी में उत्सव जैसा था मतदान’

Deoria Updated Sat, 25 Jan 2014 05:45 AM IST
रुद्रपुर। वर्ष 1952 में पहली बार देश में जब आम चुनाव का बिगुल बजा तो लोगाें में प्रत्याशी चुनने से ज्यादा मतदान करने की उत्सुकता थी। उत्सव के माहौल में लोग मतदान कर फख्र महसूस कर रहे थे। लोगों के सामने आजाद भारत की बुनियाद मजबूत करने के लिए नई चुनौतियां सामने थीं। 15 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके भी 1952 के आम चुनाव में मतदाता पोलिंग बूथ तक पहुंचे थे। देश के पहले आम चुनाव से मतदान करते चले आ रहे एकौना गांव के दलीप नारायण पांडेय ने शुक्रवार को अमर उजाला से अनुभव साझा किया।
उन्हाेंने पहले मतदान को याद करते हुए उन्होंने बताया कि नगर के डीएन इंटर कॉलेज में मतदाता मतदान के लिए व्याकुल दिख रहे थे। जब उन्हाेंने जनप्रतिनिधि का चुनाव करने के लिए पहली बार मतदान किया तो देश की आजादी का एहसास हुआ। लोकतंत्र की इस महिमा की कीमत देश के हर मतदाता को समझनी चाहिए।
नगवा के रामकलप शुक्ल भी पहले आम चुनाव से मतदान करते चले आ रहे हैं। कहा कि पहले आम चुनाव में प्रत्याशी ही मतदान की ट्रेनिंग देता था। नुक्कड़ सभाओं में मतदान करने के तरीके पर देर तक भाषण होता था। प्रत्याशी वोट मांगने की बजाय बैलेट पर मुहर लगाने का तरीका समझाते थे। तब गांव-गांव चौपाल लगाकर मतदाता बनने और मतदान के महत्व को बताया गया।

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