मिलावटखोरों के निशाने पर सेहत

Deoria Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
सलेमपुर। मिलावटखोरों ने दीपावली, भैयादूज पर हजारों कुंतल मीठा जहर बाजार में खपाने की तैयारी कर ली है। दूध, पनीर और मिठाई में मिलावट का खेल शुरू हो चुका है। कोल्ड स्टोरेज और दुकानों में सैकड़ों कुंतल खोवा, पनीर स्टोर कर लिया गया है। प्रशासन के अफसरों को भी मालूम है कि मिलावट जानलेवा साबित हो सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम छोटे मोटे दुकानों में छापा मारकर कोरम पूरा कर रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग के इस रवैए से उत्साहित मिलावटखोरों ने नगर और देहात क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की ठान ली है। नगर के मिठाई दुकानदारों की माने तो तहसील क्षेत्र में करीब एक लाख लीटर दूध की खपत होती है। जबकि मांग इससे कही ज्यादा है। त्योहार में तो डेढ़ से पौने दो लाख लीटर दूध आसानी से खप जाता है। हर रोज करीब 35 से 40 कुंतल पनीर और मिठाई इन दिनों आसानी से खप जा रहा है। त्योहारों में पनीर और मिठाई की तेजी से बढ़ रही मांग को देखते हुए मिलावटखोरों की चांदी है। मांग के हिसाब से दूध का उत्पादन कम है। ऐसे में बिना मिलावट के दूध, दही, पनीर और मिठाई की आपूर्ति मुमकिन नहीं है। इस समय मिलावट ही मांग को पूरा कर सकता है। नगर और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए यह मिलावट भले ही जानलेवा साबित हो लेकिन मिलावटखोरों को मुनाफा कमाने के लिए इससे अच्छा मौैका नहीं मिल सकता है। दो दिन पूर्व सलेमपुर नगर के तीन मिठाई दुकानों पर छापेमारी कर खाद्य विभाग की टीम अपनी कोरम पूरा कर ली।
कैसे करे नकली खोवा की पहचान
थोड़ा सा खोवा पानी में उबालकर ठंडा कर ले। फिर उसमें आयोडीन साल्यूशन की दो तीन बूंदे डाल दे। अगर खोवा का नीला रंग हो जाता है तो उसमें स्टार्च मिला हुआ है। आयोडीन साल्यूूशन मेडिकल स्टोर, विज्ञान उपकरणों की दुकान या प्रयोगशालाओं में आसानी से मिल जाता है। चुटकी भी खोवा लेकर उसे उंगलियों से दो मिनट तक मसलते रहे। अगर इस बीच खोवा की छोटी सी गोली बनी और उंगलियों की गंदगी खोवा में उतर आई तो मिलावट नहीं। अगर गोली नहीं बनी और खोवा चूर चूर होकर बिखरा तो उसमें मिलावट है। खोवा का रंग एक दम सफेद नहीं होना चाहिए बल्कि उसमें थोड़ा पीलापन होना चाहिए।
कैसे करे मिलावटी दूध की जांच
a पांच मिली कच्चे दूध में एल्कोहल और उसके बाद पांच बंद रोजेलिक एसिड मिलाए। 30 सेकेंड में दूध को रंग गहरा लाल हो जाता है तो उसमें सोडा मिला हुआ है।
a पांच मिली कच्चे दूध को उबाल कर ठंडा कर लें और दूध में पांच बूंद आयोडीन साल्यूशन डाले। नीला रंग आता है तो समझे स्टार्च की मिलावट है।
आंत में हो सकता है घाव : डा. राजेश
स्थानीय सीएचसी के डा. राजेश कुमार बताते है कि दूध, खोवा, पनीर, मिठाई में मिलावट के कारण आंतों में फेफड़ों और गलों में इंफेक्शन हो जाता है। आंत में घाव होने की आशंका भी बनी रहती है। भोजन की नली और गले में भी घाव हो सकता है। इलाज में देरी हुई तो बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। ऐसे में जान भी जा सकती है। डाक्टर का कहना है कि खोवा की बनी मिठाइयों का इस्तेमाल करने बेहतर है कि ड्राई फ्रूट्स का उपयोग किया जाए तो बेहतर होगा।
विभाग कस रहा शिकंजा
खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके त्रिपाठी ने बताया कि त्योहारों को लेकर मिलावटखोरों पर काफी शिकंजा कसा गया है। समय समय पर जिले में छापेमारी हो रही है। कोई सटीक सूचना नहीं मिलने से बड़े मिलावटखोर पकड़े नहीं जा रहे है। खाने पीने वाले सामान खरीदने वाले ग्राहकों को मिलावट का शक होने पर 9454468502 पर फोन कर शिकायत कर सकता है।

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